आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "jaan-e-bar"
नज़्म के संबंधित परिणाम "jaan-e-bar"
नज़्म
आओ मैं तुम से रूठ सी जाऊँ
आओ मुझे तुम हँस के मना लो
मुझ में सच-मुच जान नहीं है
आओ मुझे हाथों पे उठा लो
जाँ निसार अख़्तर
नज़्म
सो फ़लक ने यूँ किया देहली को तो पामाल-ए-जौर
और किया वक़्फ़-ए-जफ़ा हर-बर्ग-ओ-बार-ए-लखनऊ