aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "jaanib-e-dar"
कभी दीवार को तकती हैंकभी जानिब-ए-दर देखती हैं
अब भी तकती हैं मिरी राह वो काफ़िर आँखेंअब भी दुज़्दीदा नज़र जानिब-ए-दर है कि नहीं
बारिश-ए-संग-ए-अलम अपना मुक़द्दर ठहरीराहत-ए-दर्द मिली लुत्फ़-ओ-करम के बदले
मिटा दोमुनक़्क़श दर-ओ-बाम के जगमगाते
सोने लगती है सर-ए-शाम ये सारी दुनियाइन के हुजरों में न दर है न दरीचा कोई
जानिब-ए-साहिल-ए-हयात रवाँहसरतों की जवान अंगड़ाई
देखना जानिब-ए-मय-कदा जुर्म हैझील सी आँख में डूबना जुर्म है
जब ये सोचा कि ग़म-ओ-दर्द को मरहम लिक्खूँआँख में ठहरे हुए अश्कों को शबनम लिक्खूँ
दर्द के सफ़र पर हमनिकले जानिब-ए-मंज़िल
वो अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगरअब तो कितने क़ाफ़िलों का कारवाँ संजीव है
आलम-ए-यास में हैं पेड़ अभी महव-ए-दुआजानिब-ए-चर्ख़ उठाए हुए अपनी बाहें
नफ़्स दौड़ाता है फिर जानिब-ए-शहवत घोड़ेलज़्ज़त-ए-शय में हैं मादूम चराग़ों की लवें
कच्चे आँगन का वो घर वो बाम-ओ-दरगाँव की पगडंडियाँ वो रहगुज़र
जब तिरे शहर-ओ-कूचा-ओ-दर सेज़िंदगी सरगिराँ रही तू ने
रोकना मततेरी जानिब आ रहा हूँ
जानिब-ए-फ़लकमोहब्बत के पैराहन सजाए
अमाँ मिले न कहीं तेरे जाँ-निसारों कोजलाल-ए-फ़र्क़-ए-सर-ए-दार को नज़र न लगे
सर-ए-दीवार-ओ-दरशोख़ी से दस्तक दी
इस हज़ीं ख़ामुशी में न लौटेगा क्याशोर-ए-आवाज़-ए-हक़, नारा-ए-गीर-ओ-दार
फिर झरोकों में कोई चाँद उतर आया हैफिर सर-ए-पर्दा-ए-दर जुंबिश-ए-मिज़राब हुई
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books