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नज़्म
तेरे होंटों पे तबस्सुम की वो हल्की सी लकीर
मेरे तख़्ईल में रह रह के झलक उठती है
साहिर लुधियानवी
नज़्म
किस के चेहरे में तलाशूँ तेरे चेहरे की झलक
किस के आँचल में मिलेगी तेरी ममता की महक
शहनाज़ परवीन शाज़ी
नज़्म
इक झलक दे के जो गुम होता है वो पेड़ों में
मैं वहाँ पहुँचूँ तो टीले पे कभी चश्मे के उस पार नज़र आता है
गुलज़ार
नज़्म
अयाँ है अब तो राखी भी चमन भी गुल भी शबनम भी
झमक जाता है मोती और झलक जाता है रेशम भी