aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "jild"
नींद की लहरें गंगा जमनीजिल्द के नीचे हल्की हल्की
ख़ूबसूरत जिल्दजिस पर मेरा उन्वान लिखा था
नीली नीली जिल्द पे जैसे फूल रखा हो कोईया काग़ज़ को रात समझ कर चाँद उगा हो कोई
रुपहली जिल्द की अफ़्शाँ बिखर जाती है काग़ज़ पर
दिल ये कहता हैकि मेरी उँगलियाँ इस जिल्द के नीचे दबे
फिर ख़ाक की जिल्द में छुपेगातामील-ए-वफ़ा का अहद-नामा!
हेच मख़मल है जिल्द के आगेरंग भी रश्क-ए-अर्ग़वानी है
इस शख़्स ने उस शख़्स को किस आँख से देखा!मुझे तो यूँ लगा जैसे कोई दीवान-ए-ग़ालिब की मुनक़्क़श जिल्द की तारीफ़ करता हो
सब सितम अपनी ना-पाएदारी पे मातम-कुनाँ हैंउधड़ती हुई जिल्द जिस्मों से
कोई नहीं सोचेगाउस की दूधिया जिल्द की तह में
मशरिक़ी और मग़रिबी झोंकेजिल्द को मेरी साफ़ कर देंगे
तुम पहुँचना चाहते थे पैरहन के पारजिल्द तक महदूद था ज़ौक़-ए-जमाल
कहो! पोरें ख़यालों की सुनहरी जिल्द में जलते दियों पर रक़्स करती हैंसुराही-दार गर्दन पर दमकती नुक़रई माला... तुम्हारे कान की बाली... ये जादूगर!
चमकीली दमकती जिल्द छूती हूँमिरे महबूब लम्हे मचलते जुगनुओं जैसे
तुम मेरी मज़बूत सी दीवार होमेरे कमज़ोर पलों की जिल्द सी
रेंगती च्यूंटियाँजिल्द को चीर कर
पैरहन जिल्द और गोश्त के पार का सारा अहवाल भीजानता हूँ उसे भी ये मालूम है
उस चित्रकार को बुला सको तो बुलाओज़रा जल्द बुलाओ
ये जिल्द कैसे सख़्त खाल में ढलीये गुफ्फे-दार दुम कहाँ से आ गई
जिल्द को चीर करख़ून में मिल गईं
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