aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "jism-e-raaz"
जब तेज़ थी आँधी दूर कहींउड़ती थी क़बा-ए-जिस्म वहीं
दुख़्तर-ए-रज़ ने खोली
ज़िंदगी जिस्म-ओ-दिल-ओ-जाँ की मुनज़्ज़म क़ुव्वतमौत इज़हार परेशानी-ओ-लाचारी का
वही हैं जिस्म-ओ-दस्त-ओ-पावही अज़ल से ता-अबद
निफ़ाक़ से ख़ुदा बचाए रोग ये ख़बीस हैलिबास-ए-जिस्म-ए-आदमी में कोढ़ है छुपा हुआ
हर इक है बे-ख़ुद-ओ-सरशार मस्त-ओ-दीवानाबग़ैर-ए-दुख़्तर-ए-रज़ है ख़ुमार होली में
पाँव लहर खा गएजिस्म-ए-नाज़ के शरार
इक जिस्म-ए-नहीफ़-ओ-ज़ार मगर इक अज़्म-ए-जवान-ओ-मुस्तहकमचश्म-ए-बीना मा'सूम का दिल ख़ुर्शीद नफ़स ज़ौक़-ए-शबनम
'अर्क़-ए-जिस्म-ओ-जाँ को सूरज की क़रा'-अंबीक़ मेंरोज़ रखते हैं उबलने के लिए
मेरी ख़ातिर शहर मेंवो फ़रोज़ाँ जिस्म-ओ-जाँ
हसीन फूल हसीं पतियाँ हसीं शाख़ेंलचक रही हैं किसी जिस्म-ए-नाज़नीं की तरह
उख़ुव्वत का जिस्म-ए-नाज़ुक कुचल रहा हैहुमकती मा'सूमियत को नेज़ों से छेदता है
आमेज़िश कहाँकितना ज़िया'-ए-जिस्म-ओ-जाँ
मौज-ए-ख़ूँ प्यासीसदा-ब-सहरा हैं चीख़ें दरीदा जिस्म-ए-ज़मीं
ये जवाँ हौसलगी पर्दा-दर-ए-राज़ न हो
शब-ओ-रोज़रफ़्तार की आग में
चाँद तारों के ऐ राज़-दानोमेरे नग़्मे तुम्हारे लिए हैं
मेरा जिस्म-ए-ना-तावाँ मेरा ग़ुलाम-ए-बा-वफ़ावाक़ई मालूम होता है थका हारा हुआ
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