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नज़्म
हत्ता कि अपने ज़ोहद-ओ-रियाज़त के ज़ोर से
ख़ालिक़ से जा मिला है सो है वो भी आदमी
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
जोहद-ए-हस्ती की कड़ी धूप में थक जाने पर
जिस की आग़ोश ने बख़्शा है मुझे माँ का ख़ुलूस
मुस्तफ़ा ज़ैदी
नज़्म
मिरी नज़रों से ओझल अब मक़ाम-ए-जोहद-ए-हस्ती है
न वो एहसास-ए-इशरत है, न वो अंजुम-परस्ती है
शौकत परदेसी
नज़्म
यूँ तो पीने के बहुत चर्चे हैं बज़्म-ए-ज़ोहद में
कौन काफ़िर है जिसे इंकार है बरसात में
सुहैल काकोरवी
नज़्म
ये जोहद-ओ-कश्मकश ये ख़रोश-ए-जहाँ भी देख
अदबार की, सरों पे घनी बदलियाँ भी देख