aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "john"
आधी आधी बात पूछनी शुरूअ कीजॉन डन क्या कर रहा है
जॉन-बिल की हैं साज़िशें जारीमुल्क पर हैं नवाज़िशें जारी
मोटी सी मैगज़ीन भी थी इक धरी हुईजिस के सर-ए-वरक़ पे थे सर-जॉन-माइकल
तुम जब आओगी तो खोया हुआ पाओगी मुझेमेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ भी नहीं
हर बार मेरे सामने आती रही हो तुमहर बार तुम से मिल के बिछड़ता रहा हूँ मैं
चाहता हूँ कि भूल जाऊँ तुम्हेंऔर ये सब दरीचा-हा-ए-ख़याल
मैं शायद तुम को यकसर भूलने वाला हूँशायद जान-ए-जाँ शायद
सय्यद-'जौन'-एलिया हसनी-उल-हुसैनी सपूत-जाह''मगर नाज़िर हमारा सोख़्ता-सुल्ब आख़िरी नस्साब अब मरने ही वाला है
मैं भूल जाऊँ तुम्हेंअब यही मुनासिब है
धुँद छाई हुई है झीलों परउड़ रहे हैं परिंद टीलों पर
वो किताब-ए-हुस्न वो इल्म ओ अदब की तालीबावो मोहज़्ज़ब वो मुअद्दब वो मुक़द्दस राहिबा
कौन आया हैकोई नहीं आया है पागल
वो 'जौन' जो नज़र आता है उस का ज़िक्र नहींतुम अपने 'जौन' का जो तुम में है भरम रखना
तुम्हारे नाम तुम्हारे निशाँ से बे-सरोकारतुम्हारी याद के मौसम गुज़रते जाते हैं
बिसात-ए-ज़िंदगी तो हर घड़ी बिछती है उठती हैयहाँ पर जितने ख़ाने जितने घर हैं
मुझ से पहले के दिनअब बहुत याद आने लगे हैं तुम्हें
ये किताबों की सफ़-ब-सफ़ जिल्देंकाग़ज़ों का फ़ुज़ूल इस्ती'माल
मैं अमृता तुम्हें सोचूँ तो मेरे साहिर होमैं फ़ारेहा तुम्हें देखूँ तो जौन लगते हो
सुना है तुम ने अपने आख़िरी लम्हों में समझा थाकि तुम मेरी हिफ़ाज़त में हो मेरे बाज़ुओं में हो
चाहे तुम मेरी बीनाई खुरच डालो फिर भी अपने ख़्वाब नहीं छोड़ूँगाउन की लज़्ज़त और अज़िय्यत से मैं अपना कोई अहद नहीं तोडूँगा
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