आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "jur.at-e-tark-e-mulaaqaat"
नज़्म के संबंधित परिणाम "jur.at-e-tark-e-mulaaqaat"
नज़्म
तबीअत अब तो है आमादा-ए-तर्क-ए-ग़ज़ल-ख़्वानी
चे रा कारी कुनद आक़िल कि बाज़ आयद पशेमानी
असद जाफ़री
नज़्म
जिस से शादाब है मुद्दत से मिरा ज़ौक़-ए-तलब
आज तक़रीब में ये तर्ज़-ए-मुलाक़ात तिरा
अब्दुल अहद साज़
नज़्म
परतव रोहिला
नज़्म
तलब-ओ-तर्क-ए-तलब सिलसिला-ए-बे-पायाँ
मर्ग ही ज़ीस्त का उन्वान है हर ख़ून-शुदा ख़्वाहिश में
वहीद अख़्तर
नज़्म
तुम्हारे रोज़-ओ-शब से अब कोई निस्बत नहीं लेकिन
तुम्हारा 'अक्स हर लम्हे के आईने में मिलता है
बशर नवाज़
नज़्म
तर्क-ए-दुनिया का समाँ ख़त्म-ए-मुलाक़ात का वक़्त
इस घड़ी ऐ दिल-ए-आवारा कहाँ जाओगे