aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "kaath"
इस कठ-पुतली जैसी ज़िंदगी कीडोरी टूट जाती है
पान कत्था सिगरेट तम्बाकू चूना लौंग सुपारी
तस्वीरों की शक्ल में आवेज़ां रहते हैंजिस में रक्खे काठ के घोड़े
एक राजकुमार आया था घोड़ी चढ़उम्मीदें उछलने लगीं थी बढ़-चढ़
जीती जागती औरत कोकठ-पुतली बनाने में
बात सिर्फ़ इतनी थीहम अपने फ़र्सूदा जज़्बों के काठ-कबाड़ को भी
यक्का रेहड़ा बंबू काठवाह मियाँ मिठ्ठू तेरे ठाठ
काठ-कबाड़काठ-कबाड़ से थोड़ा आगे तिरछा पेपर-वेट
काठ का हसीं घोड़ाहिनहिना रहा होगा
आइंदा के ख़्वाबों की उर्यानी का दुख झाँक रहा थाख़त-ए-शुऊर से आज अगर हम
सफ़र के रास्ते मालूम हैंनक़्शे पुराने काठ के संदूक़ में महफ़ूज़ हैं सब
सवारी ऊँट कीया काठ के आसाब की है
चमकीले क़ालीन के नीचेकितना काठ कबाड़ छुपा है
तुम मुझे रंग ज़ाविएक़द काठ से मत मापो
ख़ुद तो वो सिर्फ़ कठ-पुतली है
खेल खिलौने काठ के बौनेसब के सब हैरान
काठ के बैल मर्द, शीशे कीपुतलियाँ औरतें, पसीने की
कठ-पुतली ने होली खेलीऔर कंचों से गोली खेली
आँगन मेंकठ-पुतली ने पौदे लगाए
कौन है कौन की सहमी सी सदावो भी कुछ कह न सका मैं के सिवा
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