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नज़्म
इक जहाँ जिस में न हो इल्म-ओ-ख़िरद की दार-ओ-गीर
हो न जिस में काविश-ए-सूद-ओ-ज़ियाँ मेरे लिए
जलील क़िदवई
नज़्म
तेरी बातों में तिरा फ़न तेरे फ़न में तेरी बात
क्यूँ हो तेरे बाब में फिर काविश-ए-ज़ात-ओ-सिफ़ात
नाज़िश प्रतापगढ़ी
नज़्म
जोश मलीहाबादी
नज़्म
मजीद अमजद
नज़्म
साँवले चेहरे पे वो कानों के बाले की दमक
नाज़-ए-बे-जा भी न था रुख़ पे तफ़ाख़ुर की झलक
असलम अंसारी
नज़्म
चाक-दामन हैं यहाँ चाक-जिगर हैं कितने
लोग कितने हैं यहाँ काविश-ए-पैहम का शिकार