आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "kaif-e-kashish"
नज़्म के संबंधित परिणाम "kaif-e-kashish"
नज़्म
हमीं हैं 'सूर'-ओ-'तुलसी' 'ग़ालिब'-ओ-'टैगोर' भी होंगे
हमीं क्या 'कैफ़' हम लोगों से बेहतर और भी होंगे
कैफ़ अहमद सिद्दीकी
नज़्म
जिस ने ख़ुलूस-ए-दिल से ऐ 'कैफ़' सब को पाला
जिस का हर एक घर में अब भी है बोल-बाला
कैफ़ अहमद सिद्दीकी
नज़्म
और अब ये राह-गुज़र भी है दिल-फ़रेब ओ हसीं
है इस की ख़ाक में कैफ़-ए-शराब-ओ-शेर मकीं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
ये कैफ़-ओ-रंग-ए-नज़ारा ये बिजलियों की लपक
कि जैसे कृष्ण से राधा की आँख इशारे करे
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
तेरे ही नग़्मे से कैफ़-ओ-इम्बिसात-ए-ज़िंदगी
तेरी सौत-ए-सरमदी बाग़-ए-तसव्वुफ़ की बहार
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
रूह में जिस ने भरी उर्दू के बे-जाँ जाम में
कैफ़-ए-एहसास-ए-अमल है जिस के हर पैग़ाम में