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नज़्म
तिरे अशआ'र पढ़ता हूँ तिरे नग़्मात गाता हूँ
कमाल-ए-कैफ़-ओ-फ़र्त-ए-बे-खु़दी में झूम जाता हूँ
शातिर हकीमी
नज़्म
कमाल-ए-नज़्म-ए-हस्ती की अभी थी इब्तिदा गोया
हुवैदा थी नगीने की तमन्ना चश्म-ए-ख़ातम से
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ये कमाल-ए-पैरवी-ए-अली ये फ़राख़-हौसलगी तिरी
कि ख़ुद अपने दुश्मन-ए-जाँ को भी वही अरमुग़ान-ए-दुआ दिया
इक़बाल सुहैल
नज़्म
ख़ुश हूँ फ़िराक़-ए-क़ामत-ओ-रुख़्सार-ए-यार से
सर्व-ओ-गुल-ओ-समन से नज़र को सताएँ हम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
कमाल-ए-हुस्न-ओ-फ़साहत जमाल-ए-नुत्क़-ओ-बयाँ
ये मुक़तदी हैं और इन की इमाम है उर्दू
ज़किया सुल्ताना नय्यर
नज़्म
कमाल-ए-ख़ुद-फ़रेबी से फ़ना को भी बक़ा जानो
और अपनी ख़ुश-ख़याली से मकाँ को ला-मकाँ समझो
नईम सिद्दीक़ी
नज़्म
'अक़ीदत-गाह से माँगी हुई 'ऐनक लगाता हूँ
गुमाँ के अस्प-ए-ताज़ी पर कमाल-ए-बर्क़-रफ़्तारी दिखाता हूँ
आबिद रज़ा
नज़्म
अकबर इलाहाबादी
नज़्म
‘इल्म-ओ-कमाल-ओ-ईमाँ बर्बाद हो रहे हैं
'ऐश-ओ-तरब के बंदे ग़फ़लत में सो रहे हैं