aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "karb-e-ehsaas"
अपनी अक़दार से तसादुम-ख़ेज़दर्द-ए-एहसास की नुमू-ख़ेज़ी
हम कभी उभरे तो एहसास-ए-फ़रावाँ की तरहऔर कभी हम को पुकारा गया अफ़्कार-ए-दवाम
बस एक मैं हूँ कि कर्ब-ए-एहसास मेरा सायाये ज़ात का ग़म जो साथ आया
फिर तसव्वुर खा रहा है पेच-ओ-ताबफिर वही हैजान-ओ-हरकत कर्ब-ओ-दर्द-ओ-इज़तिराब
न हिस्स-ओ-कर्ब-ए-जाँ-फ़ज़ान ज़ौक़-ए-अहरमन-फ़गन
कहीं आबगीना ख़याल काकि जो कर्ब-ए-ज़ब्त से चूर था
निखारेंकौन है दिल के सिवा उस कर्ब-ए-राज़-ए-पैकराँ
कर्ब-ए-तख़्लीक़ की नद्दियाँरूह के ज़ख़्म धोती हुई
सूना सूना सारा शहरकर्ब-ए-तन्हाई का ज़ह्र
कर्ब-ए-माज़ी के गिराँ बोझ से डूबी नब्ज़ेंलाख चाहें पे उभरने का गुमाँ ला-हासिल
कि ये सिलसिला-ए-कर्ब-ओ-अलम ख़त्म तो होऔर हो जाए जुनूँ आवारा
है रक़म कहाँ वो अबकर्ब-ए-ज़ीस्त सब मेरा
ये कर्ब-ए-जान-लेवा कब तलकरिहाई कब मिलेगी इस उम्मीदी-ओ-ना-उमीदी से
वो जो इक नूर निहाँ सुब्ह-ए-अज़ल तू ने किया था इस मेंकर्ब-ए-तख़्लीक़ जगाता है जिसे
फ़हम-ओ-इदराक-ओ-एहसास यूँ बे-असरजैसे मैं इक खंडर
उतर रहे हैंसरों पे कर्ब-ओ-बला के मौसम का सख़्त ख़ेमा खींचा हुआ है
एक तूफ़ान-ए-कर्ब-ओ-बलाइब्तिदा
फ़क़त इक ख़रीदा हुआ कर्ब-ए-क़िस्मत है उन की
शाफ़ी-ए-कर्ब-ए-रह-रवाँ होऐ शाम मेहरबाँ हो
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