aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "kasb-e-mut.harrik"
कस्ब-ए-मुतहर्रिक से पा-बस्ता नसब तुग़रेये क्या है कोई अहल-ए-ख़ातम से नहीं कहता
तो ने कस्ब-ए-फ़ुनून-ए-जंग कियासब में शोहरत है तेरी क़ुव्वत की
ऐसा बातिल तिलिस्म-ए-रंग हुआमुंहदिम क़स्र-ए-नाम-ओ-नंग हुआ
कुछ कस्ब-ए-हुनर कर लूँगुल-हा-ए-मज़ामीं से
बैठिए दम-भर शहीदान-ए-वतन की ख़ाक परआइए उस ख़ाक से कस्ब-ए-फ़ज़ीलत कीजिए
हाँ ये मुमकिन है शुआएँ हों ज़रर का बाइ'सकौन कहता है उजालों से करो कस्ब-ए-ज़ियाँ
कब आए क्या लाए
न कोई लहर हैकाश आए कोई
काश आ जाए मसीहा कोई बीमारों में
इक मिरा दिलमिरा कासा-ए-जाँ
क्या मा'लूमकि अपनी बारी कब आ जाए
शाम हुईकर्ब ओ बला, सन्नाटा हर-सू
चाँद कब से है सर-ए-शाख़-ए-सनोबर अटकाघास शबनम में शराबोर है शब है आधी
ये मदरसे इलाहीबच्चों के क़स्र-ए-शाही
कर्ब-ए-ज़ीस्त सब मेरागुफ़्तुगू का ढब मेरा
सूना सूना सारा शहरकर्ब-ए-तन्हाई का ज़ह्र
मुश्किलें आसाँ हों कुछक़ल्ब-ए-परेशाँ के लिए
कासा-ए-नमनाक से उस नेग़रज़ की गंदगी
एक ही तफ़्सीर हैक़स्र-ए-ज़ुलेख़ा में आज
कहकशाएँ बनाई गईंफिर उसी कासा-ए-दह्र से
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