aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "khauf-e-khud"
कुछ इस तरह से बढ़ा दिल में ज़ौक़-ए-आज़ादीकि रफ़्ता रफ़्ता तमन्ना जवान होती गईकुछ इस तरह से उठी हर तरफ़ से वो आँधीजो उठते उठते ख़ुद इक आसमान होती गई
मुझे तेरे तसव्वुर से ख़ुशी महसूस होती हैदिल-ए-मुर्दा में भी कुछ ज़िंदगी महसूस होती हैये तारों की चमक में है न फूलों ही की ख़ुश्बू मेंतिरी तस्वीर में जो दिलकशी महसूस होती हैतुझे मैं आज तक मसरूफ़-ए-दर्स-ओ-वा'ज़ पाता हूँतिरी हस्ती मुकम्मल आगही महसूस होती हैये क्या मुमकिन नहीं तू आ के ख़ुद अब इस का दरमाँ करफ़ज़ा-ए-दहर में कुछ बरहमी महसूस होती हैउजाला सा उजाला है तिरी शम-ए-हिदायत काशब-ए-तीरा में भी इक रौशनी महसूस होती हैमैं आऊँ भी तो क्या मुँह ले के आऊँ सामने तेरेख़ुद अपने-आप से शर्मिंदगी महसूस होती हैतख़य्युल में तिरे नज़दीक जब मैं ख़ुद को पाता हूँमुझे उस वक़्त इक-तरफ़ा ख़ुशी महसूस होती हैतू ही जाने कहाँ ले आई मुझ को आरज़ू तेरीये मंज़िल अब सरापा बे-ख़ुदी महसूस होती है'कँवल' जिस वक़्त खो जाता हूँ मैं उस के तसव्वुर मेंमुझे तो ज़िंदगी ही ज़िंदगी महसूस होती है
सब माल निकालो, ले आओऐ बस्ती वालो ले आओये तन का झूटा जादू भीये मन की झूटी ख़ुश्बू भीये ताल बनाते आँसू भीये जाल बिछाते गेसू भीये लर्ज़िश डोलते सीने कीपर सच नहीं बोलते सीने कीये होंट भी, हम से क्या चोरीक्या सच-मुच झूटे हैं गोरी?इन रम्ज़ों में इन घातों मेंइन वादों में इन बातों मेंकुछ खोट हक़ीक़त का तो नहीं?कुछ मैल सदाक़त का तो नहीं?ये सारे धोके ले आओये प्यारे धोके ले आओक्यूँ रक्खो ख़ुद से दूर हमेंजो दाम कहो मंज़ूर हमें
छोटी सी बिल्लूछोटा सा बस्ताठूँसा है जिस मेंकाग़ज़ का दस्तालकड़ी का घोड़ारुई का भालूचूरन की शीशीआलू कचालूबिल्लू का बस्ताजिन की पिटारीजब इस को देखोपहले से भारीलट्टू भी इस मेंरस्सी भी इस मेंडंडा भी इस मेंगिल्ली भी इस मेंऐ प्यारी बिल्लूये तो बताओक्या काम करनेइस्कूल जाओउर्दू न जानोइंग्लिश न जानोकहती हो ख़ुद कोबिल्क़ीस बानोउम्र की इतनीकच्ची नहीं होछे साल की होबच्ची नहीं होबाहर निकालोलकड़ी का घोड़ाये लट्टू रस्सीये गिल्ली डंडागुड़िया के जूतेजंपर जुराबेंबस्ते में रक्खोअपनी किताबेंमुँह न बनाओइस्कूल जाओऐ प्यारी बिल्लूऐ प्यारी बिल्लू
चुपके से कानों में कह जाख़ुशियों का सन्देस सुना जाप्रेम तू अपनी डगर बता जाक्या तू जोगन बन बैठीदूर कहीं माया से छुप करतू बन गई अनोखीदेख री तेरे सोग में कैसा हाल किया हम ने अपनादुख के कंकर पत्थर चुनते कोमल हाथ हैं पथराएजीवन के रस्ते पर बिखरे काँटे सौ सौ डंक उठाएनफ़रत की आँधी से धुँदले पड़ गए चंदा तारेघिर आई है चारों ओरदेख घटा घनघोरआँखों से ओझल है अम्बरपाप का झोंका चले भयंकरहलचल मच गई बाहर अंदरचारों ओर बगूले उड़ते इधर उधर बौलाएजैसे उन को खोज किसी कीसर टकराते सर को उठाए सर को झुकाएसर के बल कुछ फिरते हैंसब को खोज है तेरीप्रेम कहाँ तू छुप कर बैठीहम से क्यों है रूठीआ देख कि तेरे न होने सेक्या क्या दुख हम ने झेलेप्रेम-पुजारी जितने थे सब बन गए अत्याचारीख़ुद ही अत्याचार करे हैबन बैठे बेचारेअपने अत्याचार को भोगेकैसे खेल निरालेलेकिन उन के मन में कैसी ज्वाला जाग उठी हैअब तो तेरी ही उन को बस अंतिम आस लगी हैऐ जोगनक्या तू भी ढूँढे कोई प्रेम-पुजारीउस की खोज में बन गई है तू बिल्कुल ही बन-बासीमन में झाँक के देख ले सब केतेरी चाह बसी हैदूरी तेरी भड़काए है अब तो मन में डाहऔर हमारे होंटों का हर शब्द बना है आह
नशात-अंगेज़ रातों और ख़्वाबों के शफ़क़-आलूद चेहरे कोझुलसते दिन की ख़ीरा-कुन फ़ज़ा मेंएक उम्र-ए-राएगाँ के आइने में महव हो कर कब नहीं देखाबरस गुज़रे रुतें बीती वतन से बे-वतन होने की सारी बेबसी झेलीमैं बर्फ़ानी इलाक़ों मर्ग़-ज़ारों वादियों और रेगज़ारों सेनिशान-ए-कारवाँ चुनता सदा-ए-रफ़्तगाँ सुनता हुआ गुज़राकहाँ मुमकिन था लेकिन मैं ने जो देखा सुना वो याद रक्खा अजब ये हैनहीं गर हाफ़िज़े में कुछ तो वो इक नाम है तेराख़बर कब थी कि बहती उम्र की सरकश रवानी मेंमुझे जो याद रहना चाहिए थामैं वही इक नाम भूलूँगापरिंदों और पेड़ों से जहाँ भी गुफ़्तुगू होगीतुम्हारा ज़िक्र आते ही धुँदलकेज़ेहन में इक मौजा-ए-तारीक बन कर फैलते जाएँगेऔर ये हाफ़िज़ा मफ़्लूज आँखों से मुझेघूरेगा चिल्लाएगाख़ौफ़-ए-ख़ुद-फ़रामोशी से तुम डरते थे लेकिन अबमआल-ए-ख़ुद-फ़रामोशी से तुम कैसे निभाओगेग़ुबार अंदर ग़ुबार अंगड़ाइयाँ लेते हुएरस्ते में जो कुछ खो चुके हो उस को कैसे ढूँड पाओगेये लाज़िम तो नहीं है, एक अन-बूझी पहेली जब अचानक याद आ जाएउसे हर हाल में हर बार बूझोगेतुम अपने आप से कब तक किसी का नाम पूछोगे
दिल है पहलू में तो पैदा शेवा-ए-तुरकाना करजौर हफ़्त-अफ़्लाक के होते रहें परवा न करग़म को ख़ुद आकर बहा जाएगी मौज-ए-सुरूरदेखता क्या है उठ और फ़िक्र-ए-मय-ओ-पैमाना करदा'वा-ए-उल्फ़त जता कर मुफ़्त में रुस्वा न होदार पर चढ़ने से पहले राज़-ए-इश्क़ अफ़्शा न करज़र्फ़-ए-नैसाँ चाहती है क़ुल्ज़ुम-आशामी तिरीबर्ग-ए-गुल की तरह शबनम के लिए तरसा न करकाम इब्राहीमियों का है कि खेलें आग सेकूद पड़ शो'लों में ख़ौफ़ अंजाम का असला न करले के नाम अल्लाह का तूफ़ाँ में कश्ती डाल देख़ौफ़-ए-बे-पायानी-ए-दरिया-ए-मौज-अफ़ज़ा न करख़ुद अमल तेरा है सूरत-गर तिरी तक़दीर काशिकवा करना हो तो अपना कर मुक़द्दर का न करसाया-ए-शमशीर में पोशीदा जन्नत है मगरना-कसों के सामने इस भेद का चर्चा न कर
लफ़्ज़ ज़ंजीर हुआख़ौफ़-ए-दरबाँ है तज़ब्ज़ुब ज़िंदाँ
ख़ौफ़-ए-तबाही मिट जाएगाअम्न का परचम लहराएगा
याँ जिंस-ए-तग़य्युर सस्ती हैयाँ ख़ौफ़-ए-बुलंद-ओ-पस्ती हैफ़ितरत भी रहीन-ए-हस्ती हैये वहम-ओ-गुमाँ की बस्ती हैजिस देस में आनी राज नहींउस देस में चल संसार करें
लाहोरी आबाई मकान मेंसर्फ़ चचा सुल्तान अकेले रहते थेजिन की घनी नूरानी दाढ़ीख़ौफ़-ए-ख़ुदा से हिलती रहती थी
नौजवानी में खुल के हँसने परख़ौफ़-ए-रुस्वाई साथ रहता है
नए शुऊर की है रौशनी निगाहों मेंइक आग सी भी है अब अपनी सर्द आहों मेंखिलेंगे फूल नज़र के सहर की बाँहों मेंदुखे दिलों को इसी आस का सहारा हैख़ुदा तुम्हारा नहीं है ख़ुदा हमारा हैउसे ज़मीन पे ये ज़ुल्म कब गवारा हैतिलिस्म-ए-साया-ए-ख़ौफ़-ओ-हरास तोड़ेंगेक़दम बढ़ाएँगे ज़ंजीर-ए-यास तोड़ेंगेकभी किसी के न हम दिल की आस तोड़ेंगेरहेगा याद जो अहद-ए-सितम गुज़ारा हैउसे ज़मीन पे ये ज़ुल्म कब गवारा है
अब मैं कैसे रहूँ बे-ख़ौफ़-ओ-ख़तरसामने लाखों दुख खड़े हैं सतर
ज़ाहिद-ए-ख़ुश्क रहा ख़ौफ़-ए-गुनह से लेकिनअब मोहब्बत का गुनहगार बनाने आ जा
ज़ियाँ हम-नफ़स हैक़फ़स है सड़क है सड़क है क़फ़स हैक़फ़स में क़तारों की लम्बी फ़सीलेंफ़सीलों के ख़ौफ़-ए-जुनूँ-ख़ेज़ में अबमसाफ़त तवालत पकड़ने लगी यूँसड़क बन गई एक दलदलमिरे दस्त-ओ-पा शल
वो लम्हे कितने दिलकश थेवो घड़ियाँ कितनी प्यारी थींजुग जुग की दो प्यासी रूहेंबे-ख़ौफ़-ओ-ख़तर अंजान मिलीं
हो गई बे-सूद तलक़ीन-ए-सवाबअब दिलाएँ भी तो क्या ख़ौफ़-ए-अज़ाबअब हरीफ़-ए-शैख़ कोई भी नहींख़त्म है हर एक मौज़ू-ए-ख़िताब
मिरे दिल में ख़ौफ़-ए-जहाँ भी हैहै यक़ीन कुछ तो गुमाँ भी हैअभी तर्ज़-ए-नौ से हूँ बे-ख़बरमिरे साथ चल मिरे साथ चल
कोई सहरा-ए-दर्द-ओ-कर्ब हूँ मैंख़ौफ़-ओ-ख़दशात के जहन्नुम मेंकितनी सदियों से जल रहा हूँ मैं
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books