aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "ko.De"
हक़ बात पे कोड़े और ज़िंदाँ बातिल के शिकंजे में है ये जाँइंसाँ हैं कि सहमे बैठे हैं खूँ-ख़्वार दरिंदे हैं रक़्साँ
गर्म लोहे से तुम्हारे जिस्म दागे़ जाएँगेतुम को कोड़े मार कर उल्लू बनाया जाएगा
हम जान पाए हैंबहुत कुछ है जिसे अब भी हमें डीकोड करना है
कोड याद रहते हैंएटमी धमाकों से
मुबारक वो साअत कि जब बर्क़ के कोड़े लहरातीलोहे की चीलों से और
किस की याद चमक उट्ठी है धुँदले ख़ाके हुए उजागरयूँही चंद पुरानी क़ब्रें खोद रहा हूँ तन्हा बैठा
मछलियों से कहो कि हट के सड़ेंघास खोदे यहाँ की तरकारी
इक कोड की तरहमअ'नी छुपाता है
दुखते हुए सीनों की ख़ुश्बू के हाथों मेंउन जलते ख़्वाबों के लहराते कोड़े हैं
जिन्हें दोज़ख़ की आग रोज़ जलाएगीजिन पर ग़ैज़-ओ-ग़ज़ब के कोड़े हर साअ'त बरसाए जाएँगे
के मेरी रूह पर कोड़े कोई बरसा रहा हैबदन यूँ सर्द है
सब मुझ पर कोड़े बरसातेले जा रहें हैं अजनबी से मक़ाम पर
और छकड़े में जुता रेंग रहा है ताज़ीज़ख़्म ही ज़ख़्म है कोड़े का ज़ि-सर ता-ब-कमर
मार कर कोड़े कोई जैसे उठा देता हैडर के सब भागते हैं खेतों को मैदानों को
मवेशियों का चाराकोड़े मारता रहता है माँ बाप की ज़ख़्मी रूह को बरहना कर के
आज घिन आ रही हैमिरे दिल के पांसे पे खोदे गए
औरतें ना-महरम के साथ नज़र आएँ तोकोड़े और पत्थर मारे जाएँगे
ब्लू कोडशहर-ए-जाँ तेरे मकीनों को
रात आई तो धुआँ-धार घटा भी लाईबहर-ओ-बर गूँज उठे अब्र से कोड़े बरसे
ज़माने के हालात से क्या लड़ेंगेदिलों पे जफ़ाओं के कोड़े पड़ेंगे
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