आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "koyal"
नज़्म के संबंधित परिणाम "koyal"
नज़्म
अली सरदार जाफ़री
नज़्म
जब रात की ज़ुल्मत घटती है जब सुब्ह का नूर उभरता है
जब कोयल कूकू करती है जब पंछी पी पी करता है
बहज़ाद लखनवी
नज़्म
कभी सिकंदर कभी क़लंदर कभी बगूला कभी ख़याल
स्वाँग रचाए और गुज़र की इस आबाद ख़राबे में
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
नारा-ज़न रहती है कोयल बाग़ के काशाने में
चश्म-ए-इंसाँ से निहाँ पत्तों के उज़्लत-ख़ाने में
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
कोयल की सुरीली तानों पर थम थम के पपीहा गाता है
हल हो के हवा की लहरों में सावन का महीना आता है
नुशूर वाहिदी
नज़्म
कुकड़ूँ कूँ की तान लगा के मुर्ग़ा गाय ख़याल
क़ुमरी अपनी ठुमरी गाय मुर्ग़ी देवे ताल