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नज़्म
है डर कैसा तुम्हारे हम-सफ़र जब अहल-ए-फ़न भी हैं
तुम्हारे साथ शा'इर भी हैं और इन में 'चमन' भी हैं
चमन सीतापुरी
नज़्म
सेहन-ए-चमन पर भौउँरों के बादल एक ही पल को छाएँगे
फिर न वो जा कर लौट सकेंगे फिर न वो जा कर आएँगे
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
ग़ालिब-ए-आतिश-नवा कुंज-ए-लहद में है ख़मोश
सोज़ से दिल के भरे नग़्मात में तासीर कौन
मुनीर वाहिदी
नज़्म
अब कहाँ छोटा सा वो राधा का कुंज-ए-ख़ुश-गवार
अब कहाँ वो आह मथुरा तेरे फूलों की बहार
सुरूर जहानाबादी
नज़्म
इसी के नूर से मेरा हुआ क़ल्ब-ओ-जिगर रौशन
दर ईं चे शक रफ़ीक़-ए-कुंज-ए-तन्हाई किताब-ए-मन
अमान ज़ख़ीरवी
नज़्म
कुंज-ए-माज़ी में हैं बाराँ-ज़दा ताइर की तरह आसूदा
और कभी फ़ितना-ए-नागाह से डर कर चौंकें