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नज़्म
ख़ुशा वो दौर-ए-बे-ख़ुदी कि जुस्तुजू-ए-यार थी
जो दर्द में सुरूर था तो बे-कली क़रार थी
आमिर उस्मानी
नज़्म
मुझे तुम अपनी बाँहों में जकड़ लो और मैं तुम को
किसी भी दिल-कुशा जज़्बे से यकसर ना-शनासाना
जौन एलिया
नज़्म
हमारे दामन-ए-अफ़्कार पर तेरा ही साया है
ख़ुशा स्कूल कि हम ने तुझी से फ़ैज़ पाया है
अब्दुल अहद साज़
नज़्म
हर एक कुश्ता-ए-ना-हक़ की ख़ामुशी पे सलाम
हर एक दीदा-ए-पुर-नम की आब-ओ-ताब की ख़ैर
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
ख़ुशा कि आज ब-फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा वो दिन आया
कि दस्त-ए-ग़ैब ने इस घर की दर-कुशाई की
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
सुब्ह को ला कर नसीम दिल-कुशा हर शाख़ पर
ताज़ा-तर किस किस तरह के गुल खिलाती है बहार