आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "laase"
नज़्म के संबंधित परिणाम "laase"
नज़्म
ढल चुकी रात बिखरने लगा तारों का ग़ुबार
लड़खड़ाने लगे ऐवानों में ख़्वाबीदा चराग़
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
उस नार में ऐसा रूप न था जिस रूप से दिन की धूप दबे
इस शहर में क्या क्या गोरी है महताब-रुख़े गुलनार-लबे
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
तू बधिया लादे बैल भरे जो पूरब पच्छम जावेगा
या सूद बढ़ा कर लावेगा या टूटा घाटा पावेगा
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
ता-बदख़्शाँ फिर वही ला'ल-ए-गिराँ पैदा करे
सू-ए-गर्दूं नाला-ए-शब-गीर का भेजे सफ़ीर