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नज़्म
रात दिन सर पर मुसल्लत लंच असराने डिनर
और हुकूमत ख़र्च अगर दे दे तो हज का भी सफ़र
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
हमारा हौसला तो देखिए कि लंच खाते ही
नहीं लौटेंगे अब हम शाम तक खा कर क़सम निकले