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नज़्म
अपनी सोई हुई दुनिया को जगा लूँ तो चलूँ
अपने ग़म-ख़ाने में इक धूम मचा लूँ तो चलूँ
मुईन अहसन जज़्बी
नज़्म
हुई फिर इमतिहान-ए-इशक़ की तदबीर बिस्मिल्लाह
हर इक जानिब मचा कुहराम-ए-दार-ओ-गीर बिस्मिल्लाह
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
शोर मचा है बाज़ारों में टूट गए दर ज़िंदानों के
वापस माँग रही है दुनिया ग़सब-शुदा हक़ इंसानों के
साहिर लुधियानवी
नज़्म
बकरा जो सींग वाला भी है और फ़सादी है
उस ने सियासी-जलसों में गड़बड़ मचा दी है