aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "machalkaa"
जन्नत इक और है जो मर्द के पहलू में नहींउस की आज़ाद रविश पर भी मचलना है तुझे
जी मचलता था एक एक शय परजैब ख़ाली थी कुछ मोल ले न सका
जवान रात के सीने पे दूधिया आँचलमचल रहा है किसी ख़ाब-ए-मर्मरीं की तरह
सावन आया धूम मचाताघिर-घिर काले बादल छाए
सब्ज़ मद्धम रौशनी में सुर्ख़ आँचल की धनकसर्द कमरे में मचलती गर्म साँसों की महक
तुम्हारा ख़ून मिरे जिस्म में मचलता रहाज़रा से क़तरे बहाने का मौक़ा तो देते
न जाने क्यूँ मचल पड़ामैं अपने घर से चल पड़ा
और ये रूह जो तेरे लिए बेचैन सी हैगीत बन कर तिरे होंटों पे मचल जाएगी
ऐ नए साल बता तुझ में नया-पन क्या हैहर तरफ़ ख़ल्क़ ने क्यों शोर मचा रखा है
यही प्याला-ओ-सुराही-ओ-सुबू का मरहला है वोकि जब खमीर-ए-आब-ओ-गिल से वो जुदा हुए
एक नया मरहला
मैं उसे चाहूँ भी तो याद नहीं कर सकतातू उसे खो के मचल सकता है रो सकता है
ये कैसी बाद-ए-बहार है जिस में शाख़-ए-उर्दू न फल सकेगीवो कैसा रू-ए-निगार होगा न ज़ुल्फ़ जिस पर मचल सकेगी
दूर दरवाज़ा खुला कोई कोई बंद हुआदूर मचली कोई ज़ंजीर मचल के रोई
मचलती हैं सीने में लाख आरज़ुएँतड़पती हैं आँखों में लाख इल्तिजाएँ
बादल हवा के ऊपर हो मस्त छा रहे हैंझड़ियों की मस्तियों से धूमें मचा रहे हैं
मचलते, मुस्कुराते, जागते, जज़्बात का मंज़र
हर अदा में है जवाँ आतिश-ए-जज़्बात की रौये मचलते हुए शोले ये तड़पती हुई लौ
कानों में मचल रही थी बालीबाँहों से लिपट रहा था गजरा
सुगंध रात की रानी की जब मचलती हैफ़ज़ा में रूह-ए-तरब करवटें बदलती है
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books