आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "marg-e-aashiq"
नज़्म के संबंधित परिणाम "marg-e-aashiq"
नज़्म
अपनी प्यास इक दूसरे के ख़ूँ से बुझा रही है
ये संग-दिल जश्न-ए-मर्ग-ए-अम्बोह-ए-बे-गुनाहाँ मना रहे हैं
ज़िया जालंधरी
नज़्म
वो दायरा रवाँ है जिस के हर सफ़र की इंतिहा
मक़ाम-ए-मर्ग-ए-ताज़गी मक़ाम-ए-मर्ग-ए-नग़्मगी
बलराज कोमल
नज़्म
वहीद अख़्तर
नज़्म
इलाही फिर मज़ा क्या है यहाँ दुनिया में रहने का
हयात-ए-जावेदाँ मेरी न मर्ग-ए-ना-गहाँ मेरी
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
कि मर्ग-ए-ज़ात के एहसास से भर जाऊँगा फ़ौरन
तुम्हें मैं भूलना चाहूँगा तो मर जाऊँगा फ़ौरन
रहमान फ़ारिस
नज़्म
वो मर्ग-ए-भीष्म-पितामह वो सेज तीरों की
वो पांचों पांडव की स्वर्ग-यात्रा की कथा