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नज़्म
हाँ देखा कल हम ने उस को देखने का जिसे अरमाँ था
वो जो अपने शहर से आगे क़र्या-ए-बाग़-ओ-बहाराँ था
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
है कुल की ख़बर उन को मगर जुज़ की ख़बर गुम
ये ख़्वाब हैं वो जिन के लिए मर्तबा-ए-दीदा-ए-तर हेच
नून मीम राशिद
नज़्म
पर न मुझ से पूछना मेरे दिल-ए-महज़ूँ का हाल
हम-नशीनो शाक़ गुज़रेगी ये वर्ना क़ील-ओ-क़ाल
टीका राम सुख़न
नज़्म
हेच है हर चीज़ ज़ेवर ग़ाज़ा अफ़्शाँ रंग ओ ख़ाल
हुस्न ख़ुद अपनी जगह है सौ कमालों का कमाल
जोश मलीहाबादी
नज़्म
हक़ीक़त-आश्ना तुझ को जहाँ-उस्ताद कहते हैं
जहान-ए-आरज़ू में अब भी हाल-ओ-क़ाल तेरा है
मयकश अकबराबादी
नज़्म
ऐ अदब ना-आश्ना ये भी नहीं तुझ को ख़याल
नंग है बज़्म-ए-सुख़न में मदरसे की क़ील-ओ-क़ाल
जोश मलीहाबादी
नज़्म
हम ने तुम्हारी सब की सब क़ुव्वतों का फ़ैसला किया था
क़ील-ओ-क़ाल की गुंजाइश बाक़ी नहीं है