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नज़्म
तेरे रुख़ से परतव-ए-मा'सूम-ए-मरियम आश्कार
तेरे जलवोें की सबाहत से फ़रिश्ते शर्मसार
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
ये धरती ये जीवन-सागर ये संसार हमारा है
अमृत बादल बन के उठे हैं पर्बत से टकराएँगे
मसूद अख़्तर जमाल
नज़्म
जाओ जाओ मुझे नींद आई है सोने दो मुझे
दिन गुज़र जाता है लफ़्ज़ों का तआ'क़ुब करते