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नज़्म
शाइ'र भी जो मीठी बानी बोल के मन को हरते हैं
बंजारे जो ऊँचे दामों जी के सौदे करते हैं
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
नौनिहालों को सुनाती मीठी मीठी लोरियाँ
नाज़नीनों को सुनहरे ख़्वाब दिखलाती हुई
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
महबूब गले से लिपटा हो और कुहनी, चुटकी, लातें हों
कुछ बोसे मिलते जाते हों कुछ मीठी मीठी बातें हों
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
हक़ तो ये है कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी है
गर न मीठी हो तो कड़वी भी ख़ुशामद कीजे
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
निगाहें धुंद के पर्दों में उन को ढूँडती हैं
और समाअत उन की मीठी नर्म आहट के लिए
अमजद इस्लाम अमजद
नज़्म
किसी औरत का पैराहन किसी ख़ल्वत की ख़ुशबुएँ
किसी इक लफ़्ज़-ए-बे-मअ'नी की मीठी मीठी सरगोशी