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नज़्म
क्या बधिया भैंसा बैल शुतुर क्या गौनें पल्ला सर-भारा
क्या गेहूँ चाँवल मोठ मटर क्या आग धुआँ और अँगारा
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
देर से बैठे हो नख़्ल-ए-रास्ती की छाँव में
क्या ख़ुदा-ना-कर्दा कुछ मोच आ गई है पाँव में
जोश मलीहाबादी
नज़्म
दिल शाद किया और मोह लिया ये, जौबन पाया होली ने
कुछ तबले खटके ताल बजे कुछ ढोलक और मुर्दंग बजी
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
''यारो मुझे माफ़ रखो मैं नशे में हूँ''
''अब दो तो जाम ख़ाली ही दो मैं नशे में हूँ''