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नज़्म
दिल शाद किया और मोह लिया ये, जौबन पाया होली ने
कुछ तबले खटके ताल बजे कुछ ढोलक और मुर्दंग बजी
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
लक्ष्मी की मोहब्बत ने दिल मोह लिया इतना
मुँह मोड़ के का'बे से पहुँचे सू-ए-बुत-ख़ाना
ज़रीफ़ लखनवी
नज़्म
सलाहुद्दीन परवेज़
नज़्म
वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा