आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "mukallaf"
नज़्म के संबंधित परिणाम "mukallaf"
नज़्म
ख़ुदा का शुक्र है कि तुम उन से मुख़्तलिफ़ निकले
जो फूल तोड़ के ग़ुस्से में बाग़ छोड़ते हैं
तहज़ीब हाफ़ी
नज़्म
मुख़्तलिफ़ हर मंज़िल-ए-हस्ती को रस्म-ओ-राह है
आख़िरत भी ज़िंदगी की एक जौलाँ-गाह है
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
पेश-तर इस के कि हम फिर से मुख़ालिफ़ सम्त को
बे-ख़ुदा-हाफ़िज़ कहे चल दें झुका कर गर्दनें
अहमद फ़राज़
नज़्म
मुँह में कुछ खोखले बे-मअ'नी से जुमले रख लो
मुख़्तलिफ़ हाथों में सिक्कों की तरह घिसते रहो
निदा फ़ाज़ली
नज़्म
न मिरा मकाँ ही बदल गया न तिरा पता कोई और है
मिरी राह फिर भी है मुख़्तलिफ़ तिरा रास्ता कोई और है