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नज़्म
दफ़'अतन ठोकर लगी और चलते चलते गिर पड़ा
मुर्ग़-ए-बिस्मिल दम के दम में बन गया वो नीम-जाँ
अब्दुल क़य्यूम ज़की औरंगाबादी
नज़्म
तेरी रेहाना-ए-शे’र और तिरी सलमा-ए-शराब
किस की हो कर रहें 'बिस्मिल' के सिवा तेरे बा'द
बिस्मिल सईदी
नज़्म
ख़ुद-फ़रेबी में गिरफ़्तार नहीं है 'बिस्मिल'
क्या ये तख़्लीक़ बराए निगह-ए-नाज़ नहीं
बिसमिल देहलवी
नज़्म
सूरत-ए-तस्वीर चुप 'बिस्मिल' हुए ये बोल कर
हुस्न की दुनिया है देखो दीदा-ए-दिल खोल कर
बिस्मिल इलाहाबादी
नज़्म
आ कन्हैय्या कि तिरे वास्ते हम 'बिस्मिल' हैं
कहने सुनने के लिए दिल है मगर बे-दिल हैं
बिस्मिल इलाहाबादी
नज़्म
ज़िंदगी इंसाँ की है मानिंद-ए-मुर्ग़-ए-ख़ुश-नवा
शाख़ पर बैठा कोई दम चहचहाया उड़ गया
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
पर-ए-पर्वाज़ मुर्ग़-ए-शोक़-ए-दिल को मिल गए फिर से
तमन्नाओं के पज़मुर्दा शगूफ़े खिल गए फिर से
बिर्ज लाल रअना
नज़्म
रक़्स-ए-मीना से उठे नग़्मा-ए-रक़्स-ए-बिस्मिल
साज़ ख़ुद अपने मुग़न्नी को गुनहगार करें
अहमद फ़राज़
नज़्म
मायूस हर शजर ने बदला लिबास अपना
हर मुर्ग़-ए-ख़ुश-नवा ने छेड़ा नया तराना
मोहम्मद शरफ़ुद्दीन साहिल
नज़्म
जिन की चोटी पर न पहुँचे कोई मुर्ग़-ए-तेज़-पर
सौदा-ए-लाल-ओ-जमुर्रद थी वहाँ की ख़ाक भी
मुंशी नौबत राय नज़र लखनवी
नज़्म
आ 'जमाल'-ए-ज़ार को भी राज़दार-ए-दिल बना
ज़िंदगी इस की भी इक बर्क़-ए-दिल-ए-बिस्मिल बना