आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "naqsh-e-paa-e-junuu.n"
नज़्म के संबंधित परिणाम "naqsh-e-paa-e-junuu.n"
नज़्म
नहीं मुमकिन मिटाना मुझ को मिस्ल-ए-नक़श-ए-पा यारो
ख़लाओं में रहूँगा गूँजता बन कर सदा यारो
सदा अम्बालवी
नज़्म
ख़िज़्र की बेजा ख़ुशामद ही मुक़द्दम है यहाँ
वस्ल-ए-मंज़िल के लिए पा-ए-जुनूँ शर्त नहीं
ज़हीर सिद्दीक़ी
नज़्म
दम-ए-कोहसार में ढूँडा तो न निकला कुछ भी
बर्फ़ पर छिड़की हुई ख़ून की ख़ुशबू के सिवा
शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी
नज़्म
घड़ी की सूइयों को रोकने से दौड़ता और हाँफता सूरज मिसाल-ए-नक़्श-ए-पा
अफ़्लाक पर जम जाएगा
जावेद अनवर
नज़्म
सज्दा-रेज़ी के लिए इस रहगुज़र में ऐ जबीं
नक़्श-ए-पा-ए-दोस्त की तक़लीद होनी चाहिए
मयकश अकबराबादी
नज़्म
सज्दा-रेज़ी के लिए इस रहगुज़र में ऐ जबीं
नक़्श-ए-पा-ए-दोस्त की तक़लीद होनी चाहिए
मैकश हैदराबादी
नज़्म
ख़म जबीं होती है उस की नक़्श-ए-पा-ए-दोस्त पर
और झुक जाते हैं उस के पाँव पर दोनों जहाँ
प्रेम लाल शिफ़ा देहलवी
नज़्म
तितलियाँ अपने परों पर पा के क़ाबू हर तरफ़
सेहन-ए-गुलशन की रविश पर रक़्स फ़रमाने लगीं
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
चमकते हुए सब बुतों को मिटा दो
कि अब लौह-ए-दिल से हर इक नक़्श हर्फ़-ए-ग़लत की तरह मिट चुका है