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नज़्म
तोड़ लेना शाख़ से तुझ को मिरा आईं नहीं
ये नज़र ग़ैर-अज़-निगाह-ए-चश्म-ए-सूरत-बीं नहीं
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
आज भी अश्क-ए-ख़ूँ मिरा क़श्क़ा जबीन-ए-नाज़ का
आज भी ख़ाक-ए-दिल मिरी सुरमा-ए-चश्म-ए-गुल-रुख़ाँ
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
मैं दिल में तस्वीर खींचती हूँ निगाह-ए-हैरत से देखती हूँ
ये क्या है ऐ मेरी चश्म-ए-हैराँ
बिलक़ीस जमाल बरेलवी
नज़्म
मिरी निगाहों में इज़्ज़त है सारी दुनिया की
मगर है ख़ाक-ए-वतन सुर्मा चश्म-ए-बीना की
क़ैसर अमरावतवी
नज़्म
''ताज़ आग़ोश-ए-विदाइ'श दाग़-ए-हैरत चीदा अस्त
हम-चू शम-ए-कुश्ता दर-चश्म-ए-निगह ख़्वाबीदा अस्त''