आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "nik.hat-e-zulf"
नज़्म के संबंधित परिणाम "nik.hat-e-zulf"
नज़्म
किसी ने निकहत-ए-ज़ुल्फ़-परेशाँ का नहीं पूछा
किसी ने दुख के अंदर रौशनी की छब नहीं देखी
अब्बास ताबिश
नज़्म
नफ़स नफ़स में बसी हुई निकहत-ए-गुल-ए-तर
ख़लाओं में मुश्तरी ओ ज़ोहरा का रक़्स जारी
हिमायत अली शाएर
नज़्म
मिरे बाज़ू पे जब वो ज़ुल्फ़-ए-शब-गूँ खोल देती थी
ज़माना निकहत-ए-ख़ुल्द-ए-बरीं में डूब जाता था
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
निकहत-ए-गेसू को तेरी निकहत-ए-सुम्बुल लिखूँ
तेरे नर्म-ओ-नाज़ुक इन होंटों को बर्ग-ए-गुल लिखूँ
जय राज सिंह झाला
नज़्म
चमन को छोड़ के निकला हूँ मिस्ल-ए-निकहत-ए-गुल
हुआ है सब्र का मंज़ूर इम्तिहाँ मुझ को
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
आज भी है रची हुई आज भी है बसी हुई
मेरे नफ़स में ख़ुल्द की नुज़हत-ओ-निकहत-ए-जवाँ
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
मैं शाइ'र हूँ मुझे अहल-ए-हुनर फ़नकार कहते हैं
मुझे रम्ज़-आश्ना-ए-निकहत-ए-गुलज़ार कहते हैं
असद जाफ़री
नज़्म
ज़ुल्फ़ों के पेच-ओ-ख़म में बहारें छुपी हुई
इक कारवान-ए-निकहत-ए-बुसताँ लिए हुए