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नज़्म
ब-ज़िद हैं फिर भी कज-नज़र हयात शाद-काम है
नुमाइश-ओ-नुमूद-ओ-नंग-ओ-नाम पर निगाह है!
मोहसिन भोपाली
नज़्म
सरीर काबिरी
नज़्म
गुमाँ होता है की लश्कर-कुशी बाद-ए-बहारी ने
ज़िरह-पोश आब हो जाता है जब बादल गुज़रते हैं
नज़्म तबातबाई
नज़्म
क्या अजब आग़ाज़-ए-हस्ती, क्या अजब आग़ाज़-ए-कार
जैसे वो ईसार-पेशा मर्द दाना-ओ-ग़मीं
मोहम्मद इज़हारुल हक़
नज़्म
सर-ए-ख़ाक-ए-शाहीरे बर्ग-हा-ए-लाला मी पाशम
कि ख़ूनश बा-निहाल-ए-मिल्लत-ए-मा साज़गार आमद
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ये वो धंदा है बरी है क़ैद-ए-इन्कम-टेक्स से
ये वो पेशा है नहीं जिस पर गिरानी का असर
इस्मतुल्लाह इस्मत बेग
नज़्म
मुबारक हो तबस्सुम ज़ेर-ए-लब तुझ को अज़ीज़ों का
अदब से जिन के होंटों तक हँसी रू-पोश आई है
बर्क़ देहलवी
नज़्म
नाराज़ किस लिए हो ख़ामोश किस लिए हो
अहबाब-ए-बा-वफ़ा से रू-पोश किस लिए हो
मिर्ज़ा मोहम्मद हादी अज़ीज़ लखनवी
नज़्म
इस एहतिमाम-ए-ख़्वाब-ए-तहय्युर में मैं नज़ाद
तन्हा खड़ा हूँ अपनी नुमाइश के वास्ते