आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "paa-e-naaz"
नज़्म के संबंधित परिणाम "paa-e-naaz"
नज़्म
तितलियाँ अपने परों पर पा के क़ाबू हर तरफ़
सेहन-ए-गुलशन की रविश पर रक़्स फ़रमाने लगीं
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
''कोई माशूक़ ब-सद-शौकत-ओ-नाज़ आता है
सुर्ख़ बैरक़ है समुंदर में जहाज़ आता है''
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
अकेले फूल चुन लें बाग़ में तो ख़ैर चुन भी लें
मगर तन्हा प-ए-गुल-गश्त मैं जाऊँ न वो जाएँ
अली मंज़ूर हैदराबादी
नज़्म
ज़िंदगी को नागवार इक सानेहा जाने हुए
बज़्म-ए-किबर-ओ-नाज़ में फ़र्ज़ अपना पहचाने हुए
सीमाब अकबराबादी
नज़्म
अभी ज़बान-ए-मोहब्बत पे है फ़साना-ए-नाज़
ये तुझ से कौन कहे ऐ निगार-ख़ाना-ए-नाज़
सय्यद आबिद अली आबिद
नज़्म
बज़्म-ए-हुस्न-ओ-नाज़ की दिलदारियाँ भी सो गईं
हिज्र की रातों की वो बे-ख़ूबियाँ भी हो गईं