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नज़्म
दिल ही में दर्द-ए-दिल रहे लब पर फ़ुग़ाँ न हो
राज़-ए-निहाँ का और कोई राज़-दाँ न हो
नूर लुधियानवी
नज़्म
ज़बान-ए-लग़्ज़िश-ए-पा पर फ़साना-ए-शब-ओ-रोज़
सुतूर-ए-चीन-ए-जबीं में हदीस-ए-माज़ी-ओ-हाल
रज़ा नक़वी वाही
नज़्म
तारे जुगनू हैं कि मोती फूल हैं या सीपियाँ
कहकशाँ है धूल तारों की कि मौज-ए-पुर-ख़रोश-ओ-दुर-फ़शाँ
यूसुफ़ ज़फ़र
नज़्म
अगर ऐ शम'-ए-दिल जलना ही था तुझ को तो जलना था
किसी बेकस की तुर्बत पर चराग़-ए-नीम-जाँ हो कर
अहसन अहमद अश्क
नज़्म
और कोह-ए-आतिश-फ़शाँ के दहाने से गुज़र किया हूँ
और उस पर अभी जब ना-तमामी का एहसास डसता रहा
शहाब जाफ़री
नज़्म
मिरी मश्क़-ए-सुख़न का जब हुआ उन पर असर ज़्यादा
मेहरबानी है उन की मुझ पे कम और है क़हर ज़्यादा
ग़ौस ख़ाह मख़ाह हैदराबादी
नज़्म
जुम्बिश-ए-मिज़्गाँ में ग़लताँ साज़-ए-ग़म का ज़ेर ओ बम
ख़ामुशी में पर-फ़िशाँ ईफ़ा-ए-पैमाँ की क़सम
जोश मलीहाबादी
नज़्म
मख़मूर सईदी
नज़्म
मख़मूर सईदी
नज़्म
पर-फ़िशाँ है जज़्बा-ए-पिन्हाँ उभरने के लिए
मुज़्तरिब है ज़र्रा ज़र्रा रक़्स करने के लिए