aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "parii"
आ कि वाबस्ता हैं उस हुस्न की यादें तुझ सेजिस ने इस दिल को परी-ख़ाना बना रक्खा थाजिस की उल्फ़त में भुला रक्खी थी दुनिया हम नेदहर को दहर का अफ़्साना बना रक्खा था
दो पाँव बने हरियाली परएक तितली बैठी डाली परकुछ जगमग जुगनू जंगल सेकुछ झूमते हाथी बादल सेये एक कहानी नींद भरीइक तख़्त पे बैठी एक परीकुछ गिन गिन करते परवानेदो नन्हे नन्हे दस्तानेकुछ उड़ते रंगीं ग़ुबारेबब्बू के दुपट्टे के तारेये चेहरा बन्नो बूढ़ी काये टुकड़ा माँ की चूड़ी काये मुझ से मिलने आए हैंमैं ख़ुद न जिन्हें पहचान सकूँकुछ इतने धुँदले साए हैं
शा'इरसाहिल-ए-दरिया पे मैं इक रात था महव-ए-नज़रगोशा-ए-दिल में छुपाए इक जहान-ए-इज़तिराबशब सुकूत-अफ़्ज़ा हवा आसूदा दरिया नर्म सैरथी नज़र हैराँ कि ये दरिया है या तस्वीर-ए-आबजैसे गहवारे में सो जाता है तिफ़्ल-ए-शीर-ख़्वारमौज-ए-मुज़्तर थी कहीं गहराइयों में मस्त-ए-ख़्वाबरात के अफ़्सूँ से ताइर आशियानों में असीरअंजुम-ए-कम-ज़ौ गिरफ़्तार-ए-तिलिस्म-ए-माहताबदेखता क्या हूँ कि वो पैक-ए-जहाँ-पैमा ख़िज़्रजिस की पीरी में है मानिंद-ए-सहर रंग-ए-शबाबकह रहा है मुझ से ऐ जूया-ए-असरार-ए-अज़लचश्म-ए-दिल वा हो तो है तक़्दीर-ए-आलम बे-हिजाबदिल में ये सुन कर बपा हंगामा-ए-मशहर हुआमैं शहीद-ए-जुस्तुजू था यूँ सुख़न-गुस्तर हुआऐ तिरी चश्म-ए-जहाँ-बीं पर वो तूफ़ाँ आश्कारजिन के हंगामे अभी दरिया में सोते हैं ख़मोशकश्ती-ए-मिस्कीन-ओ-जान-ए-पाक-ओ-दीवार-ए-यतीमइल्म-ए-मूसा भी है तिरे सामने हैरत-फ़रोशछोड़ कर आबादियाँ रहता है तू सहरा-नवर्दज़िंदगी तेरी है बे-रोज़-ओ-शब-ओ-फ़र्दा-ओ-दोशज़िंदगी का राज़ क्या है सल्तनत क्या चीज़ हैऔर ये सरमाया-ओ-मेहनत में है कैसा ख़रोशहो रहा है एशिया का ख़िरक़ा-ए-देरीना चाकनौजवाँ अक़्वाम-ए-नौ-दौलत के हैं पैराया-पोशगरचे अस्कंदर रहा महरूम-ए-आब-ए-ज़िंदगीफितरत-ए-अस्कंदरी अब तक है गर्म-ए-नाओ-नोशबेचता है हाशमी नामूस दीन-ए-मुस्तफ़ाख़ाक-ओ-ख़ूँ में मिल रहा है तुर्कमान-ए-सख़्त-कोशआग है औलाद-ए-इब्राहीम है नमरूद हैक्या किसी को फिर किसी का इम्तिहाँ मक़्सूद हैजवाब-ए-ख़िज़रसहरा-नवर्दी
शायद कि इन्हीं टुकड़ों में कहींवो साग़र-ए-दिल है जिस में कभीसद-नाज़ से उतरा करती थीसहबा-ए-ग़म-ए-जानाँ की परी
जो जिस्म का ईंधन थागुलनार किया हम नेवो ज़ह्र कि अमृत थाजी भर के पिया हम नेसौ ज़ख़्म उभर आएजब दिल को सिया हम नेक्या क्या न मोहब्बत कीक्या क्या न जिया हम नेलो कूच किया घर सेलो जोग लिया हम नेजो कुछ था दिया हम नेऔर दिल से कहा हम नेरुकना नहीं दरवेशायूँ है कि सफ़र अपनाथा ख़्वाब न अफ़्सानाआँखों में अभी तक हैफ़र्दा का परी-ख़ानासद-शुक्र सलामत हैपिंदार-ए-फ़क़ीरानाइस शहर-ए-ख़मोशी मेंफिर नारा-ए-मस्तानाऐ हिम्मत-ए-मर्दानासद-ख़ारा-ओ-यक-तेशाऐ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशाऐ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा
जब आदमी के पेट में आती हैं रोटियाँफूली नहीं बदन में समाती हैं रोटियाँआँखें परी-रुख़ों से लड़ाती हैं रोटियाँसीने उपर भी हाथ चलाती हैं रोटियाँजितने मज़े हैं सब ये दिखाती हैं रोटियाँरोटी से जिस का नाक तलक पेट है भराकरता परे है क्या वो उछल कूद जा-ब-जादीवार फाँद कर कोई कोठा उछल गयाठट्ठा हँसी शराब सनम साक़ी इस सिवासौ सौ तरह की धूम मचाती हैं रोटियाँजिस जा पे हाँडी चूल्हा तवा और तनूर हैख़ालिक़ की क़ुदरतों का उसी जा ज़ुहूर हैचूल्हे के आगे आँच जो चलती हुज़ूर हैजितने हैं नूर सब में यही ख़ास नूर हैइस नूर के सबब नज़र आती हैं रोटियाँआवे तवे तनूर का जिस जा ज़बाँ पे नामया चक्की चूल्हे के जहाँ गुलज़ार हों तमामवाँ सर झुका के कीजे ङंङवत और सलामइस वास्ते कि ख़ास ये रोटी के हैं मक़ामपहले इन्हीं मकानों में आती हैं रोटियाँइन रोटियों के नूर से सब दिल हैं बोर बोरआटा नहीं है छलनी से छन-छन गिरे है नूरपेङ़ा हर एक उस का है बर्फ़ी ओ मोती चूरहरगिज़ किसी तरह न बुझे पेट का तनूरइस आग को मगर ये बुझाती हैं रोटियाँपूछा कसी ने ये किसी कामिल फ़क़ीर सेये मेहर-ओ-माह हक़ ने बनाए हैं काहे केवो सुन के बोला बाबा ख़ुदा तुझ को ख़ैर देहम तो न चाँद समझें न सूरज हैं जानतेबाबा हमें तो ये नज़र आती हैं रोटियाँफिर पूछा उस ने कहिए ये है दिल का तूर क्याइस के मुशाहिदे में है खुलता ज़ुहूर क्यावो बोला सुन के तेरा गया है शुऊ'र क्याकश्फ़-उल-क़ुलूब और ये कश्फ़-उल-क़ुबूर क्याजितने हैं कश्फ़ सब ये दिखाती हैं रोटियाँरोटी जब आई पेट में सौ क़ंद घुल गएगुलज़ार फूले आँखों में और ऐश तुल गएदो तर निवाले पेट में जब आ के ढुल गएचौदह तबक़ के जितने थे सब भेद खुल गएये कश्फ़ ये कमाल दिखाती हैं रोटियाँरोटी न पेट में हो तो फिर कुछ जतन न होमेले की सैर ख़्वाहिश-ए-बाग़-ओ-चमन न होभूके ग़रीब दिल की ख़ुदा से लगन न होसच है कहा कसी ने कि भूके भजन न होअल्लाह की भी याद दिलाती हैं रोटियाँअब आगे जिस के माल-पूए भर के थाल हैंपूरे भगत उन्हें कहो साहब के लाल हैंऔर जिन के आगे रोग़नी और शीर-माल हैंआरिफ़ वही हैं और वही साहब-कमाल हैंपक्की-पकाई अब जिन्हें आती हैं रोटियाँकपड़े किसी के लाल हैं रोटी के वास्तेलम्बे किसी के बाल हैं रोटी के वास्तेबाँधे कोई रुमाल हैं रोटी के वास्तेसब कश्फ़ और कमाल हैं रोटी के वास्तेजितने हैं रूप सब ये दिखाती हैं रोटियाँरोटी से नाचे प्यादा क़वाएद दिखा दिखाअसवार नाचे घोड़े को कावा लगा लगाघुंघरू को बाँधे पैक भी फिरता है नाचताऔर इस सिवा जो ग़ौर से देखा तो जा-ब-जासौ सौ तरह के नाच दिखाती हैं रोटियाँरोटी के नाच तो हैं सभी ख़ल्क़ में पड़ेकुछ भाँड भीगते ये नहीं फिरते नाचतेये रंडियाँ जो नाचे हैं घूँघट को मुँह पे लेघूँघट न जानो दोस्तो तुम ज़ीनहार उसेइस पर्दे में ये अपने कमाती हैं रोटियाँअशराफ़ों ने जो अपनी ये ज़ातें छुपाई हैंसच पूछिए तो अपनी ये शानें बढ़ाई हैंकहिए उन्हों की रोटियाँ किस किस ने खाई हैंअशराफ़ सब में कहिए तो अब नान-बाई हैंजिन की दुकाँ से हर कहीं जाती हैं रोटियाँदुनिया में अब बदी न कहीं और निकोई हैया दुश्मनी ओ दोस्ती या तुंद-ख़ूई हैकोई किसी का और किसी का न कोई हैसब कोई है उसी का कि जिस हाथ डोई हैनौकर नफ़र ग़ुलाम बनाती हैं रोटियाँरोटी का अब अज़ल से हमारा तो है ख़मीररूखी ही रोटी हक़ में हमारे है शहद-ओ-शीरया पतली होवे मोटी ख़मीरी हो या फ़तीरगेहूँ जवार बाजरे की जैसी हो 'नज़ीर'हम को तो सब तरह की ख़ुश आती हैं रोटियाँ
बादल हवा के ऊपर हो मस्त छा रहे हैंझड़ियों की मस्तियों से धूमें मचा रहे हैंपड़ते हैं पानी हर जा जल-थल बना रहे हैंगुलज़ार भीगते हैं सब्ज़े नहा रहे हैंक्या क्या मची हैं यारो बरसात की बहारें
मेरे वतन, प्यारे वतनराहत के गहवारे वतनहर दिल के उजयारे वतनहर आँख के तारे वतनगुल-पोश तेरी वादियाँफ़रहत-निशाँ राहत-रसाँतेरे चमन-ज़ारों पे हैगुलज़ार-ए-जन्नत का गुमाँहर शाख़ फूलों की छड़ीहर नख़्ल-ए-तूबा है यहाँकौसर के चश्मे जा-ब-जातसनीम हर आब-ए-रवाँहर बर्ग रूह-ए-ताज़गीहर फूल जान-ए-गुल्सिताँहर बाग़ बाग़-ए-दिल-कशीहर बाग़ बाग़-ए-बे-ख़िज़ाँदिलकश चरागाहें तिरीढोरों के जिन में कारवाँअंजुम-सिफ़त गुलहा-ए-नौहर तख़्ता-ए-गुल आसमाँनक़्श-ए-सुरय्या जा-ब-जाहर हर रविश इक कहकशाँतेरी बहारें दाइमीतेरी बहारें जावेदाँतुझ में है रूह-ए-ज़िंदगीपैहम रवाँ पैहम दवाँदरिया वो तेरे तुंद-ख़ूझीलें वो तेरी बे-कराँशाम-ए-अवध के लब पे हैहुस्न-ए-अज़ल की दास्ताँकहती है राज़-ए-सरमदीसुब्ह-ए-बनारस की ज़बाँउड़ता है हफ़्त-अफ़्लाक परउन कार-ख़ानों का धुआँजिन में हैं लाखों मेहनतीसनअत-गरी के पासबाँतेरी बनारस की ज़रीरश्क-ए-हरीर-ओ-परनियाँबीदर की फ़नकारी में हैंसनअत की सब बारीकियाँअज़्मत तिरे इक़बाल कीतेरे पहाड़ों से अयाँदरियाओं का पानी, तरीतक़्दीस का अंदाज़ा-दाँक्या 'भारतेंदु' ने कियागंगा की लहरों का बयाँ'इक़बाल' और चकबस्त हैंअज़्मत के तेरी नग़्मा-ख़्वाँ'जोश' ओ 'फ़िराक़' ओ 'पंत' हैंतेरे अदब के तर्जुमाँ'तुलसी' ओ 'ख़ुसरव' हैं तेरीतारीफ़ में रत्ब-उल-लिसाँगाते हैं नग़्मा मिल के सबऊँचा रहे तेरा निशाँमेरे वतन, प्यारे वतनराहत के गहवारे वतनहर दिल के उजियारे वतनहर आँख के तारे वतनतेरे नज़ारों के नगींदुनिया की ख़ातम में नहींसारे जहाँ में मुंतख़बकश्मीर की अर्ज़-ए-हसींफ़ितरत का रंगीं मोजज़ाफ़िरदौस बर-रू-ए-ज़मींफ़िरदौस बर-रू-ए-ज़मींहाँ हाँ हमीं अस्त ओ हमींसरसब्ज़ जिस के दश्त हैंजिस के जबल हैं सुर्मगींमेवे ब-कसरत हैं जहाँशीरीं मिसाल-ए-अंग्बींहर ज़ाफ़राँ के फूल मेंअक्स-ए-जमाल-ए-हूरईंवो मालवे की चाँदनीगुम जिस में हों दुनिया-ओ-दींइस ख़ित्ता-ए-नैरंग मेंहर इक फ़ज़ा हुस्न-आफ़रींहर शय में हुस्न-ए-ज़िंदगीदिलकश मकाँ दिलकश ज़मींहर मर्द मर्द-ए-ख़ूब-रूहर एक औरत नाज़नींवो ताज की ख़ुश-पैकरीहर ज़ाविए से दिल-नशींसनअत-गरों के दौर कीइक यादगार-ए-मरमरींहोती है जो हर शाम कोफ़ैज़-ए-शफ़क़ से अहमरींदरिया की मौजों से अलगया इक बत-ए-नज़्ज़ारा-बींया ताएर-ए-नूरी कोईपर्वाज़ करने के क़रींया अहल-ए-दुनिया से अलगइक आबिद-ए-उज़्लत-गुज़ीनक़्श-ए-अजंता की क़समजचता नहीं अर्ज़ंग-ए-चींशान-ए-एलोरा देख करझुकती है आज़र की जबींचित्तौड़ हो या आगराऐसे नहीं क़िलए कहींबुत-गर हो या नक़्क़ाश होतू सब की अज़्मत का अमींमेरे वतन, प्यारे वतनराहत के गहवारे वतनहर दिल के अजियारे वतनहर आँख के तारे वतनदिलकश तिरे दश्त ओ चमनरंगीं तिरे शहर ओ चमनतेरे जवाँ राना जवाँतेरे हसीं गुल पैरहनइक अंजुमन दुनिया है येतू इस में सद्र-ए-अंजुमनतेरे मुग़न्नी ख़ुश-नवाशाएर तिरे शीरीं-सुख़नहर ज़र्रा इक माह-ए-मुबींहर ख़ार रश्क-ए-नस्तरींग़ुंचा तिरे सहरा का हैइक नाफ़ा-ए-मुश्क-ए-ख़ुतनकंकर हैं तेरे बे-बहापत्थर तिरे लाल-ए-यमनबस्ती से जंगल ख़ूब-तरबाग़ों से हुस्न अफ़रोज़ बनवो मोर वो कब्क-ए-दरीवो चौकड़ी भरते हिरनरंगीं-अदा वो तितलियाँबाँबी में वो नागों के फनवो शेर जिन के नाम सेलरज़े में आए अहरमनखेतों की बरकत से अयाँफ़ैज़ान-ए-रब्ब-ए-ज़ुल-मिननचश्मों के शीरीं आब सेलज़्ज़त-कशाँ काम-ओ-दहनताबिंदा तेरा अहद-ए-नौरौशन तिरा अहद-ए-कुहनकितनों ने तुझ पर कर दियाक़ुर्बान अपना माल धनकितने शहीदों को मिलेतेरे लिए दार-ओ-रसनकितनों को तेरा इश्क़ थाकितनों को थी तेरी लगनतेरे जफ़ा-कश मेहनतीरखते हैं अज़्म-ए-कोहकनतेरे सिपाही सूरमाबे-मिस्ल यक्ता-ए-ज़मन'भीषम' सा जिन में हौसला'अर्जुन' सा जिन में बाँकपनआलिम जो फ़ख़्र-ए-इल्म हैंफ़नकार नाज़ाँ जिन पे फ़न'राय' ओ 'बोस' ओ 'शेरगिल''दिनकर', 'जिगर' 'मैथली-शरण''वलाठोल', 'माहिर', भारती'बच्चन', 'महादेवी', 'सुमन''कृष्णन', 'निराला', 'प्रेम-चंद''टैगोर' ओ 'आज़ाद' ओ 'रमन'मेरे वतन, प्यारे वतनराहत के गहवारे वतनहर दिल के अजियारे वतनहर आँख के तारे वतनखेती तिरी हर इक हरीदिलकश तिरी ख़ुश-मंज़रीतेरी बिसात-ए-ख़ाक केज़र्रे हैं महर-ओ-मुश्तरीझेलम कावेरी नाग वोगंगा की वो गंगोत्रीवो नर्बदा की तमकनतवो शौकत-ए-गोदावरीपाकीज़गी सरजू की वोजमुना की वो ख़ुश-गाैहरीदुल्लर्बा आब-ए-नील-गूँकश्मीर की नीलम-परीदिलकश पपीहे की सदाकोयल की तानें मद-भरीतीतर का वो हक़ सिर्रहुतूती का वो विर्द-ए-हरीसूफ़ी तिरे हर दौर मेंकरते रहे पैग़म्बरी'चिश्ती' ओ 'नानक' से मिलीफ़क़्र-ओ-ग़िना को बरतरीअदल-ए-जहाँगीरी में थीमुज़्मर रेआया-पर्वरीवो नव-रतन जिन से हुईतहज़ीब-ए-दौर-ए-अकबरीरखते थे अफ़्ग़ान-ओ-मुग़लइक सौलत-ए-अस्कंदरीरानाओं के इक़बाल कीहोती है किस से हम-सरीसावंत वो योद्धा तिरेतेरे जियाले वो जरीनीती विदुर की आज तककरती है तेरी रहबरीअब तक है मशहूर-ए-ज़माँ'चाणक्य' की दानिश-वरीवयास और विश्वामित्र सेमुनियों की शान-ए-क़ैसरीपातंजलि ओ साँख सेऋषियों की हिकमत-पर्वरीबख़्शे तुझे इनआम-ए-नौहर दौर चर्ख़-ए-चम्बरीख़ुश-गाैहरी दे आब कोऔर ख़ाक को ख़ुश-जौहरीज़र्रों को महर-अफ़्शानियाँक़तरों को दरिया-गुस्तरीमेरे वतन, प्यारे वतनराहत के गहवारे वतनहर दिल के अजियारे वतनहर आँख के तारे वतनतू रहबर-ए-नौ-ए-बशरतू अम्न का पैग़ाम-बरपाले हैं तू ने गोद मेंसाहिब-ख़िरद साहिब-ए-नज़रअफ़ज़ल-तरीं इन सब में हैबापू का नाम-ए-मो'तबरहर लफ़्ज़ जिस का दिल-नशींहर बात जिस की पुर-असरजिस ने लगाया दहर मेंनारा ये बे-ख़ौफ़-ओ-ख़तरबे-कार हैं तीर-ओ-सिनाँबे-सूद हैं तेग़-ओ-तबरहिंसा का रस्ता झूट हैहक़ है अहिंसा की डगरदरमाँ है ये हर दर्द काये हर मरज़ का चारा-गरजंगाह-ए-आलम में कोईइस से नहीं बेहतर सिपरकरता हूँ मैं तेरे लिएअब ये दुआ-ए-मुख़्तसररौनक़ पे हों तेरे चमनसरसब्ज़ हों तेरे शजरनख़्ल-ए-उमीद-ए-बेहतरीहर फ़स्ल में हो बारवरकोशिश हो दुनिया में कोईख़ित्ता न हो ज़ेर-ओ-ज़बरतेरा हर इक बासी रहेनेको-सिफ़त नेको-सियरहर ज़न सलीक़ा-मंद होहर मर्द हो साहिब-हुनरजब तक हैं ये अर्ज़ ओ फ़लकजब तक हैं ये शम्स ओ क़मरमेरे वतन, प्यारे वतनराहत के गहवारे वतनहर दिल के उजयारे वतनहर आँख के तारे वतन
पाई ग़ुंचों में तिरे रंग की दुनिया हम नेतेरे काँटों से लिया दरस-ए-तमन्ना हम नेतेरे क़तरों से सुनी क़िरअत-ए-दरिया हम नेतेरे ज़र्रों में पढ़ी आयत-ए-सहरा हम नेक्या बताएँ कि तिरी बज़्म में क्या क्या देखाएक आईने में दुनिया का तमाशा देखा
नज़र झुकाए उरूस-ए-फ़ितरत जबीं से ज़ुल्फ़ें हटा रही हैसहर का तारा है ज़लज़ले में उफ़ुक़ की लौ थरथरा रही हैरविश रविश नग़्मा-ए-तरब है चमन चमन जश्न-ए-रंग-ओ-बू हैतुयूर शाख़ों पे हैं ग़ज़ल-ख़्वाँ कली कली गुनगुना रही हैसितारा-ए-सुब्ह की रसीली झपकती आँखों में हैं फ़सानेनिगार-ए-महताब की नशीली निगाह जादू जगा रही हैतुयूर बज़्म-ए-सहर के मुतरिब लचकती शाख़ों पे गा रहे हैंनसीम फ़िरदौस की सहेली गुलों को झूला झुला रही हैकली पे बेले की किस अदा से पड़ा है शबनम का एक मोतीनहीं ये हीरे की कील पहने कोई परी मुस्कुरा रही हैसहर को मद्द-ए-नज़र हैं कितनी रिआयतें चश्म-ए-ख़ूँ-फ़िशाँ कीहवा बयाबाँ से आने वाली लहू में सुर्ख़ी बढ़ा रही हैशलूका पहने हुए गुलाबी हर इक सुबुक पंखुड़ी चमन मेंरंगी हुई सुर्ख़ ओढ़नी का हवा में पल्लू सुखा रही हैफ़लक पे इस तरह छुप रहे हैं हिलाल के गिर्द-ओ-पेश तारेकि जैसे कोई नई नवेली जबीं से अफ़्शाँ छुड़ा रही हैखटक ये क्यूँ दिल में हो चली फिर चटकती कलियो? ज़रा ठहरनाहवा-ए-गुलशन की नर्म रो में ये किसी की आवाज़ आ रही है?
एक तो ऊँचा सब से हिमालाउस पर मेरे देश का झंडाधरती पर आकाश का धोका
ये बरहनगी जिसे देख कर बढ़ें दस्त ओ पा न खुले ज़बाँन ख़याल ही में रहे तवाँतो वो रेग-ज़ार कि जैसे रह-ज़न-ए-पीर होजिसे ताब-ए-राह-ज़नी न होकि मिसाल-ए-त़ाएर-ए-नीम-जाँजिसे याद-ए-बाल-ओ-परी न होकिसी राह-रौ से उमीद-ए-रहम-ओ-करम लिएमैं भरा हुआ हूँ समुंदरों के जलाल सेचला आ रहा हूँ मैं साहिलों का हशम लिएहै अभी इन्ही की तरफ़ मिरा दर-ए-दिल खुलाकि नसीम-ए-ख़ंदा को रह मिलेमिरी तीरगी को निगह मिलेवो सुरूर-ओ-सोज़-ए-सदफ़ अभी मुझे याद हैअभी चाटती है समुंदरों की ज़बाँ मुझेमिरे पाँव छू के निकल गई कोई मौज-ए-साज़ ब-कफ़ अभीवो हलावतें मिरे हस्त ओ बूद में भर गईंवो जज़ीरे जिन के उफ़ुक़ हुजूम-ए-सहर से दीद-बहार थेवो परिंदे अपनी तलब में जो सर-ए-कार थेवो परिंदे जिन की सफ़ीर में थीं रिसालातेंअभी उस सफ़ीर की जल्वतें मिरे ख़ूँ में हैंअभी ज़ेहन है वो सनम लिएजो समुंदरों के फ़ुसूँ में हैंचला आ रहा हूँ समुंदरों के जमाल सेसदफ़ ओ कनार का ग़म लिए
घने दरख़्तों में पुर्वा की सीटी गूँजीदो दिक्शों में क़ैदी रूहें चीख़ रही हैंकोनों में दुबके हुए झींगर चिल्लाते हैंमेहराबों से भूतों के सर टकराते हैंक़िलए के इक बुर्ज के अंदरएक परी (शीलाट की रानी)ख़ंदक़ के अन-देखे पानी की गहराईअंदेशे के बालिश्तों से माप रही है
जब माह अघन का ढलता हो तब देख बहारें जाड़े कीऔर हँस हँस पूस सँभलता हो तब देख बहारें जाड़े कीदिन जल्दी जल्दी चलता हो तब देख बहारें जाड़े कीऔर पाला बर्फ़ पिघलता हो तब देख बहारें जाड़े कीचिल्ला ग़म ठोंक उछलता हो तब देख बहारें जाड़े कीतन ठोकर मार पछाड़ा हो और दिल से होती हो कुश्ती सीथर-थर का ज़ोर उखाड़ा हो बजती हो सब की बत्तीसीहो शोर फफू हू-हू का और धूम हो सी-सी सी-सी कीकल्ले पे कल्ला लग लग कर चलती हो मुँह में चक्की सीहर दाँत चने से दलता हो तब देख बहारें जाड़े कीहर एक मकाँ में सर्दी ने आ बाँध दिया हो ये चक्करजो हर दम कप-कप होती हो हर आन कड़ाकड़ और थर-थरपैठी हो सर्दी रग रग में और बर्फ़ पिघलता हो पत्थरझड़-बाँध महावट पड़ती हो और तिस पर लहरें ले ले करसन्नाटा बाव का चलता हो तब देख बहारें जाड़े कीहर चार तरफ़ से सर्दी हो और सेहन खुला हो कोठे काऔर तन में नीमा शबनम का हो जिस में ख़स का इत्र लगाछिड़काव हुआ हो पानी का और ख़ूब पलंग भी हो भीगाहाथों में पियाला शर्बत का हो आगे इक फर्राश खड़ाफर्राश भी पंखा झलता हो तब देख बहारें जाड़े कीजब ऐसी सर्दी हो ऐ दिल तब रोज़ मज़े की घातें होंकुछ नर्म बिछौने मख़मल के कुछ ऐश की लम्बी रातें होंमहबूब गले से लिपटा हो और कुहनी, चुटकी, लातें होंकुछ बोसे मिलते जाते हों कुछ मीठी मीठी बातें होंदिल ऐश-ओ-तरब में पलता हो तब देख बहारें जाड़े कीहो फ़र्श बिछा ग़ालीचों का और पर्दे छोटे हों आ करइक गर्म अँगीठी जलती हो और शम्अ हो रौशन और तिस परवो दिलबर, शोख़, परी, चंचल, है धूम मची जिस की घर घररेशम की नर्म निहाली पर सौ नाज़-ओ-अदा से हँस हँस करपहलू के बीच मचलता हो तब देख बहारें जाड़े कीतरकीब बनी हो मज्लिस की और काफ़िर नाचने वाले होंमुँह उन के चाँद के टुकड़े हों तन उन के रूई के गाले होंपोशाकें नाज़ुक रंगों की और ओढ़े शाल दो-शाले होंकुछ नाच और रंग की धूमें हों ऐश में हम मतवाले होंप्याले पर प्याला चलता हो तब देख बहारें जाड़े कीहर एक मकाँ हो ख़ल्वत का और ऐश की सब तय्यारी होवो जान कि जिस से जी ग़श हो सौ नाज़ से आ झनकारी होदिल देख 'नज़ीर' उस की छब को हर आन अदा पर वारी होसब ऐश मुहय्या हो आ कर जिस जिस अरमान की बारी होजब सब अरमान निकलता हो तब देख बहारें जाड़े की
दिन की ख़शम-गीं नज़रेंखो गईं सियाही मेंआहनी कड़ों का शोरबेड़ियों की झंकारेंक़ैदियों की साँसों कीतुंद-ओ-तेज़ आवाज़ेंजेलरों की बदकारीगालियों की बौछारेंबेबसी की ख़ामोशीख़ामुशी की फ़रियादेंतह-नशीं अंधेरे मेंशब की शोख़ दोशीज़ाख़ार-दार तारों कोआहनी हिसारों कोपार कर के आई हैभर के अपने आँचल मेंजंगलों की ख़ुशबुएँठण्डकें पहाड़ों कीमेरे पास लाई है
तुझ को मालूम है किस तरह तिरी उल्फ़त मेंमैं ने हर दर्द हर इक रंज भुला रक्खा थाइक तरफ़ हट के शब-ओ-रोज़ के हंगामों सेतेरे जल्वों का परी-ख़ाना सजा रक्खा थाभूल कर ग़म-कदा-ए-ज़ीस्त की तारीकी कोनूर-ए-उम्मीद से शामों को जला रखा थाकहीं दामन में लिए फिरता था ख़ुर्शीद को साथआस्तीं में कहीं महताब छुपा रखा था
ऐ शांति अहिंसा की उड़ती हुई परीआ तू भी आ कि आ गई छब्बीस जनवरी
दिल ख़ुशामद से हर इक शख़्स का क्या राज़ी हैआदमी जिन परी ओ भूत बला राज़ी हैभाई फ़रज़ंद भी ख़ुश बाप चचा राज़ी हैशाद मसरूर ग़नी शाह ओ गदा राज़ी हैजो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी हैहक़ तो ये है कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी हैअपना मतलब हो तो मतलब की ख़ुशामद कीजेऔर न हो काम तो उस ढब की ख़ुशामद कीजेऔलिया अंबिया और रब की ख़ुशामद कीजेअपने मक़्दूर ग़रज़ सब की ख़ुशामद कीजेजो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी हैहक़ तो ये है की ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी हैचार दिन जिस को किया झुक के ख़ुशामद से सलामवो भी ख़ुश हो गया अपना भी हुआ काम में कामबड़े आक़िल बड़े दाना ने निकाला है ये दामख़ूब देखा तो ख़ुशामद ही की आमद है तमामजो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी हैहक़ तो ये है कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी हैबद बख़ील और सख़ी की भी ख़ुशामद कीजेऔर जो शैतान हो तो उस की भी ख़ुशामद कीजेगर वली हो तो वली की भी ख़ुशामद कीजेजो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी हैहक़ तो ये है कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी हैप्यार से जोड़ दिए जिस की तरफ़ हाथ जो आहवहीं ख़ुश हो गया करते ही वो हाथों पे निगाहग़ौर से हम ने जो इस बात को देखा वल्लाहकुछ ख़ुशामद ही बड़ी चीज़ है अल्लाह अल्लाहजो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी हैहक़ तो ये है कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ीपीने और पहनने खाने की ख़ुशामद कीजेहीजड़े भाँड ज़नाने की ख़ुशामद कीजेमस्त ओ हुशियार दिवाने की ख़ुशामद कीजेभोले नादान सियाने की ख़ुशामद कीजेजौ ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी हैहक़ तो ये है कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी हैऐश करते हैं वही जिन का ख़ुशामद का मिज़ाजजो नहीं करते वो रहते हैं हमेशा मोहताजहाथ आता है ख़ुशामद से मकाँ मुल्क और ताजक्या ही तासीर की इस नुस्ख़े ने पाई है रिवाजजो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी हैहक़ तो ये कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी हैगर भला हो तो भले की भी ख़ुशामद कीजेऔर बुरा हो तो बुरे की भी ख़ुशामद कीजेपाक नापाक सिड़े की भी ख़ुशामद कीजेकुत्ते बिल्ली ओ गधे की भी ख़ुशामद कीजेजो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी हैहक़ तो ये कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी हैख़ूब देखा तो ख़ुशामद की बड़ी खेती हैग़ैर की अपने ही घर बीच ये सुख देती हैमाँ ख़ुशामद के सबब छाती लगा लेती हैनानी दादी भी ख़ुशामद से दुआ देती हैजो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी हैहक़ तो ये कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी हैबी-बी कहती है मियाँ आ तिरे सदक़े जाऊँसास बोले कहीं मत जा तिरे सदक़े जाऊँख़ाला कहती है कि कुछ खा तिरे सदक़े जाऊँसाली कहती है कि भय्या तिरे सदक़े जाऊँजो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी हैहक़ तो ये कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी हैआ पड़ा है जो ख़ुशामद से सरोकार उसेढूँडते फिरते हैं उल्फ़त के ख़रीदार उसेआश्ना मिलते हैं और चाहे हैं सब यार उसेअपने बेगाने ग़रज़ करते हैं सब प्यार उसेजो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी हैहक़ तो ये कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी हैरूखी और रोग़नी आबी को ख़ुशामद कीजेनान-बाई ओ कबाबी की ख़ुशामद कीजेसाक़ी ओ जाम शराबी की ख़ुशामद कीजेपारसा रिंद ख़राबी की ख़ुशामद कीजेजो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा अराज़ी हैहक़ तो ये है कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी हैजो कि करते हैं ख़ुशामद वो बड़े हैं इंसाँजो नहीं करते वो रहते हैं हमेशा हैराँहाथ आते हैं ख़ुशामद से हज़ारों सामाँजिस ने ये बात निकाली है मैं उस के क़ुर्बांजो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी हैहक़ तो ये है कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी हैकौड़ी पैसे ओ टके ज़र की ख़ुशामद कीजेलाल ओ नीलम दर ओ गौहर की ख़ुशामद कीजेऔर जो पत्थर हो तो पत्थर की ख़ुशामद कीजेनेक ओ बद जितने हैं यक-सर की ख़ुशामद कीजेजो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी हैहक़ तो ये है कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी हैहम ने हर दिल की ख़ुशामद की मोहब्बत देखीप्यार इख़्लास ओ करम मेहर मुरव्वत देखीदिलबरों में भी ख़ुशामद ही की उल्फ़त देखीआशिक़ों मैं भी ख़ुशामद ही की चाहत देखीजो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी हैहक़ तो ये है कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी हैपारसा पीर है ज़ाहिद है मना जाती हैजुवारिया चोर दग़ाबाज़ ख़राबाती हैमाह से माही तलक च्यूँटी है या हाथी हैये ख़ुशामद तो मियाँ सब के तईं भाती हैजो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी हैहक़ तो ये है कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी हैगर न मीठी हो तो कड़वी भी ख़ुशामद कीजेकुछ न हो पास तो ख़ाली भी ख़ुशामद कीजेजानी दुश्मन हो तो उस की ख़ुशामद कीजेसच अगर पूछो तो झूटी भी ख़ुशामद कीजेजो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी हैहक़ तो ये है कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी हैमर्द ओ ज़न तिफ़्ल ओ जवाँ ख़ुर्द ओ कलाँ पीर ओ फ़क़ीरजितने आलम में हैं मोहताज ओ गदा शाह वज़ीरसब के दिल होते हैं फंदे में ख़ुशामद के असीरतो भी वल्लाह बड़ी बात ये कहता है 'नज़ीर'जो ख़ुशामद करे ख़ल्क़ उस से सदा राज़ी हैहक़ तो ये है कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी है
ये सदाये सदा-ए-बाज़गश्तबे-कराँ वुसअ'त की आवारा परीसुस्त-रौ झीलों के पारनम-ज़दा पेड़ों के फैले बाज़ुओं के आस-पासएक ग़म-दीदा परिंदगीत गाता है मिरी वीरान शामों के लिए
उड़ते हुए गेसू वो नसीम-ए-सहरी केशानों पे परेशान हैं या बाल परी के
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