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नज़्म
हैं पेड़ों में छुपे हुए परिंद चहचहा रहे
ख़ुदा की शान देख कर ख़ुशी से हैं वो गा रहे
मोहम्मद शफ़ीउद्दीन नय्यर
नज़्म
यूसुफ़ ज़फ़र
नज़्म
दूर उफ़ुक़ पर ज़र्द उदासी की चादर में लिपटा चाँद
बिजली के तारों पर बैठे कुछ ख़ामोश परिंद
जानाँ मलिक
नज़्म
फुदकते हैं परिंद सब मुझी से ये तरंग है
करिश्मे देख कर मिरे हर एक अक़्ल दंग है