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नज़्म
हो ज़्याबतीस जिसे उस की दवा परहेज़ है
है रफ़ीक़-ए-ज़िंदगी ये दुख जो दर्द-आमेज़ है
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
हर ज़बाँ पर अब सला-ए-जंग है ये भी तो देख
फ़र्श-ए-गीती से सकूँ अब माइल-ए-परवाज़ है