aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "parveen-shakir"
जानमुझे अफ़्सोस है
मुझे मत बतानाकि तुम ने मुझे छोड़ने का इरादा किया था
नन्ही लड़कीसाहिल के इतने नज़दीक
वही नर्म लहजाजो इतना मुलाएम है जैसे
तुम्हारा कहना हैतुम मुझे बे-पनाह शिद्दत से चाहते हो
लड़की!ये लम्हे बादल हैं
अपने फ़ोन पे अपना नंबरबार बार डायल करती हूँ
मैं ने सारी उम्रकिसी मंदिर में क़दम नहीं रक्खा
लड़की सर को झुकाए बैठीकाफ़ी के प्याले में चमचा हिला रही है
गुड़िया सी ये लड़कीजिस की उजली हँसी से
मैं क्यूँ उस को फ़ोन करूँ!उस के भी तो इल्म में होगा
वो एक लड़कीकि जिस से शायद मैं एक पल भी नहीं मिली हूँ
खुले पानियों में घिरी लड़कियाँनर्म लहरों के छींटे उड़ाती हुई
अपने सर्द कमरे मेंमैं उदास बैठी हूँ
आँख बोझल हैमगर नींद नहीं आती है
वो बाग़ में मेरा मुंतज़िर थाऔर चाँद तुलू'अ हो रहा था
सात सुहागनें और मेरी पेशानी!संदल की तहरीर
तुम मुझ को गुड़िया कहते होठीक ही कहते हो!
उस ने मेरे हाथ में बाँधाउजला कंगन बेले का
घनेरा लहजा वो हुस्न का थाखुली ज़बाँ वो जमाल की थी
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