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नज़्म
रह-ए-मंज़िल में हम दुश्वारियों का ग़म नहीं करते
गुज़र जाते हैं हँस कर फ़िक्र-ए-पेच-ओ-ख़म नहीं करते
मुनीर वाहिदी
नज़्म
उलझ कर रह गए हैं मुद्दइ'यान-ए-रुबूबिय्यत
ख़याल-ए-ख़ाम बिल-आख़िर ख़याल-ए-ख़ाम है साक़ी
शमीम फ़ारूक़ बांस पारी
नज़्म
दरिया में शेर ख़ाक उड़ाता था नाव पर
बिस्मिल दो-ज़ानू बैठा था पुश्त-ए-बिलाव पर
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
हर एक मक़्तल में दफ़्न शो'लों की राख लाना
हर एक पुश्त-ए-बशर पे तहरीर वहशतों की लकीर लाना
हसन हमीदी
नज़्म
वो ज़ुल्फ़-ए-ख़म-ब-ख़म शमीम-ए-मस्त से धुआँ धुआँ
वो रुख़ चमन चमन बहार-ए-जावेदाँ लिए हुए