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नज़्म
शहीद-ए-जौर-ए-गुलचीं हैं असीर-ए-ख़स्ता-तन हम हैं
हमारा जुर्म इतना है हवा-ख़्वाह-ए-चमन हम हैं
आनंद नारायण मुल्ला
नज़्म
कभी ग़नीम-ए-जौर-ओ-सितम के हाथों खाई ऐसी मात
अर्ज़-ए-अलम में ख़्वार हुए हम बिगड़े रहे बरसों हालात
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
हामी-ए-जौर-ओ-सितम हर तरह माला-माल था
जिस की लाठी थी उसी की भैंस थी ये हाल था
कुँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर
नज़्म
तेरे जौर-ओ-सितम-ओ-नाज़-ओ-तलव्वुन के क़तील
काँप कर कहते हैं नैरंगी-ए-क़िस्मत तुझ को
अज़ीमुद्दीन अहमद
नज़्म
जावेद हुमायूँ
नज़्म
रहेगा यूँ लबों पर शिकवा-ए-जौर-ए-ख़िज़ाँ कब तक
सताएगा भला नाज़ुक दिलों को ये जहाँ कब तक
शौकत परदेसी
नज़्म
मज्लिस-ए-जौर-ओ-जफ़ा कारगह-ए-दाना-ओ-दाम
हाए ये तेरी ख़ुदाई का जहाँ-सोज़ निज़ाम