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नज़्म
तारिक़ क़मर
नज़्म
मेरे लिए तुम्हारा प्यार बिल्कुल वैसा था
जैसे चाय के आख़िरी घूँट में दूसरे कप की तलब
गीताञ्जलि राय
नज़्म
इक साहिब जो सोच रहे हैं पिछले एक पहर से
यूँ लगते हैं जैसे बच्चा रूठ आया हो घर से
अहमद नदीम क़ासमी
नज़्म
ज़िंदा-दिल पंजाब के बेटो तुम्हें मेरा सलाम
तुम परस्तार-ए-गुरू-नानक फ़िदा-ए-कृष्न-ओ-राम
अर्श मलसियानी
नज़्म
भागी तुम्हारी राय तो जाती नहीं है कुछ
''चलता हूँ मैं भी, टुक तो रहो, मैं नशे में हूँ