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नज़्म
शुऊर-ए-ज़िंदगी जिस के तफ़क्कुर से सँवरता है
जहान-ए-रंग-ओ-बू जिस की निगाहों में निखरता है
कमाल हैदराबादी
नज़्म
सर-ए-शाम रंग अपना तब्दील करता है तो रात का आईना जागता है
अँधेरों भरे आईने में सदाएँ हैं, सूरत नहीं
ताबिश कमाल
नज़्म
फ़रेब-ए-गुफ़्तुगू का नाम ही है फ़र्द का अमल
फ़रेब-ए-रंग-ओ-बू में खो के रह गया है आदमी
कमाल जाफ़री
नज़्म
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
तेरे पैकर में निहाँ है ख़्वाहिश-ए-औज-ए-कमाल
है तिरी ता'मीर में इल्म-ओ-अमल की काएनात
मयकश अकबराबादी
नज़्म
रंग-ए-गुल-हा-ए-गुलिस्तान-ए-वतन तुम से है
सोरिश-ए-नारा-ए-रिंदान-ए-वतन तुम से है