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नज़्म
दिल की न पूछो क्या कुछ चाहे दिल का तो फैला है दामन
गीत से गाल ग़ज़ल सी आँखें साअद-ए-सीमीं बर्ग-ए-दहन
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
मैं ने सोचा था कि दुश्वार है मंज़िल अपनी
इक हसीं बाज़ु-ए-सीमीं का सहारा भी तो है
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
हजला-ए-सीमीं की रा'नाई का अफ़्सूँ हो गई
हुस्न पत्थर बन गया फ़न की रगों का गर्म ख़ूँ
यूसुफ़ ज़फ़र
नज़्म
अल्लाह अल्लाह वो पेशानी-ए-सीमीं का जमाल
रह गई जम के सितारों की नज़र आज की रात
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
मैं ने ये समझा कि तुम हो, तुम न थे वो फूल था
धीरे धीरे चेहरा-ए-सीमीं से सरकाता नक़ाब
शमीम करहानी
नज़्म
जिस की नादानी सदाक़त के लिए बेताब है
जिस का नाख़ुन साज़-ए-हस्ती के लिए मिज़राब है