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नज़्म
जब भी महताब-ए-ज़र-अफ़्शाँ के हो चेहरे पे नक़ाब
जान हम रख के हथेली पर उलट देते हैं
नूर-ए-शमा नूर
नज़्म
क़ल्ब मेरा दौलत-ए-एहसास खो सकता नहीं
आब-ओ-ताब-ए-ज़र में ख़ुद्दारी डुबो सकता नहीं
नख़्शब जार्चवि
नज़्म
कहीं ये ख़ूँ से फ़र्द-ए-माल-ओ-ज़र तहरीर करती है
कहीं ये हड्डियाँ चुन कर महल ता'मीर करती है
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
ब-ज़ेर-ए-साया-ए-दीवार-ए-मस्जिद है जो आसूदा
ये ख़ाकी जिस्म है सत्तर बरस का राह पैमूदा
हफ़ीज़ जालंधरी
नज़्म
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
रेगज़ारों में बगूलों के सिवा कुछ भी नहीं
साया-ए-अब्र-ए-गुरेज़ाँ से मुझे क्या लेना
साहिर लुधियानवी
नज़्म
ख़्वाहिश-ए-साया-ए-गेसू-ए-परेशाँ ही नहीं
जन्नत-ए-आरिज़-ओ-लब की भी तमन्ना न करूँ
इम्तियाज़ अहमद क़मर
नज़्म
सलाम संदेलवी
नज़्म
उन की ज़ुल्फ़-ए-अम्बरीं के साया-ए-पुर-नूर में
नींद की क़िस्मत जगाने का ज़माना आ गया