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नज़्म
सब्ज़ा ओ बर्ग ओ लाला ओ सर्व-ओ-समन को क्या हुआ
सारा चमन उदास है हाए चमन को क्या हुआ
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
वरक़ तारीख़ ने तेज़ी से उल्टे
तग़य्युर ले के साज़-ओ-बर्ग-ए-ता'मीर-ए-जहाँ आया
ज़किया सुल्ताना नय्यर
नज़्म
दिल की न पूछो क्या कुछ चाहे दिल का तो फैला है दामन
गीत से गाल ग़ज़ल सी आँखें साअद-ए-सीमीं बर्ग-ए-दहन
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
तड़प रहा है अभी मुझ में साज़-ओ-बर्ग-ए-नुमू
ये मेरी कलियाँ ये पत्ते अभी तो ज़िंदगी हूँ
तसद्द्क़ हुसैन ख़ालिद
नज़्म
क़ुमरियाँ मीठे सुरों के साज़ ले कर आ गईं
बुलबुलें मिल-जुल के आज़ादी के गुन गाने लगीं