aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "sail-e-aah"
आ मिरी जान आ एक से दो भलेआज फेरे करें कूचा-ए-यार के
उबल रहा थाजैसे सैल-ए-आब के मक़ाम से
हर तरफ़सैल-ए-आब-ए-रवाँ
नूर से सरशार हैसैल-ए-मौज-ए-शहर में
गीत सैल-ए-ज़ख़्म-ए-दिल में खो गएग़म में दिलकशी नहीं
बुरा हो तेरा अरे सैल-ए-गिर्या-ए-बेताबकि इक सितारा-ए-लर्ज़ां फ़ज़ा में डूब गया
एक सैलसैल-ए-बे-कराँ
सैल-ए-बे-कराँख़ीरा-कुनाँ
भँवर जो आज घूमता है सैल-ए-रंग-ए-आब परमगर अभी सुकून है
मैं सैल-ए-नूर-ए-अंदरूँ से धुल गया!मिरे दरों की ख़ल्क़ यूँ गली गली निकल पड़ी
सैल-ए-बे-माइगी में कभीदिल उखड़ते हुए शहर गिरते हुए
न तीरगी का तलातुम, न सैल-ए-रंग-ओ-नूरन ख़ार-ज़ार-ए-तमन्ना में गुमरही का ख़याल
पहना-ए-आब साराहै कूच का इशारा
मता-ए-दिल मता-ए-जाँ तो फिर तुम कम ही याद आओबहुत कुछ बह गया है सैल-ए-माह-ओ-साल में अब तक
कभी ज़मीन का दामन ग़ुबार-आलूदाकभी गरजता हुआ सैल-ए-बे-कराँ लर्ज़ां
मेरी आँखें किसी सैल-ए-पुर-नूर की मुंतज़िर थींमिरी ज़िंदगी राख का ढेर थी
हर रग-ए-जाँ से मिस्ल-ए-सैल-ए-ग़मसब हदें
इक अज़ीम पेशेन-गोई का सैल-ए-बे-समाअ'तमहल समेत आसमान में ले उड़ा था
सैल-ए-आफ़्ताब लिख गई
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