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नज़्म
वो फ़राएज़ का तसलसुल नाम है जिस का हयात
जल्वा-गाहें उस की हैं लाखों जहान-ए-बे-सबात
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
नून मीम राशिद
नज़्म
ढूँढता हूँ अपने काशाने में वो रूह-ए-जमाल
जिस के परतव का है मज़हर ये जहान-ए-बे-सबात
सिद्दीक़ कलीम
नज़्म
कूचा-ए-बिंत-ए-सरा-ए-दहर में चलिए कभी सर-सलामत आइए
और इक रक़्स-ए-फ़ना तामील दर्स-ए-बे-ख़ुदी
मोहम्मद अनवर ख़ालिद
नज़्म
शादी-ओ-ग़म जब कि दोनों हैं जहाँ में बे-सबात
वक़्त अपना काट दे हँस बोल कर बहर-ए-ख़ुदा